Eknath And Shrikant Shinde Delhi Strategy (सोर्सः सोशल मीडिया)
Eknath Shinde Delhi Strategy: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े फेरबदल की आहट सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके पुत्र सांसद श्रीकांत शिंदे भले ही सार्वजनिक रूप से ‘ऑपरेशन टायगर’ की खबरों को महज अफवाह बता रहे हों, लेकिन शिंदे गुट के मंत्रियों के बयानों ने राज्य का सियासी पारा चढ़ा दिया है। दरअसल, साल 2024 के विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद भाजपा जिस तरह 2029 में अकेले चुनाव लड़ने की नींव तैयार कर रही है, उसे देखते हुए शिंदे अब केंद्र में अपनी ताकत बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। चर्चा है कि दिल्ली में अपनी सौदेबाजी की शक्ति मजबूत करने के लिए शिंदे की नजर अब उद्धव ठाकरे और शरद पवार गुट के सांसदों पर है।
शिंदे सेना के वरिष्ठ नेता और मंत्री भरत गोगावले ने पंढरपुर दौरे के दौरान एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने संकेत दिया कि उद्धव गुट के लगभग 8 सांसद उनके संपर्क में हैं। गोगावले ने स्पष्ट रूप से कहा कि जो सांसद फिलहाल शांत हैं, वे जल्द ही शिंदे गुट की पहली कतार में दिखाई देंगे। उन्होंने इस पूरी रणनीति को छत्रपति शिवाजी महाराज के ‘छापामार युद्ध नीति’ से जोड़ते हुए कहा कि राजनीति में हर बात सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन पर्दे के पीछे चीजें बहुत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही हैं। उन्होंने धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर का मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा न करने को भी इसी राजनीतिक खींचतान का हिस्सा बताया।
गोगावले से पहले शिवसेना (शिंदे गुट) की सांसद ज्योति वाघमारे ने नांदेड में ‘ऑपरेशन टायगर’ या ‘ऑपरेशन तुतारी’ के संकेत दिए थे। उनके अनुसार, आने वाले समय में एक बड़ा राजनीतिक विस्फोट होगा जो उद्धव की मुश्किलें बढ़ा सकता है। जिसके बाद उद्धव ने अपने सांसदों के साथ भावुक संवाद कर उन्हें रोकने की कोशिश की थी, लेकिन शिंदे गुट की ओर से भ्रम बढ़ाने का प्रयास लगातार जारी है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शिंदे अधिक सांसदों को अपने पाले में लाने में सफल होते हैं, तो केंद्र सरकार में उनका वजन बढ़ जाएगा। इससे न केवल उन्हें फंड आवंटन में 60:40 का सम्मानजनक हिस्सा मिलेगा, बल्कि भविष्य में भाजपा के ‘एकला चलो’ के इरादों पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।