एकनाथ शिंदे: दिव्यांग महिला की पुकार पर रोका काफिला, बेटे के रोजगार का मुद्दा तुरंत सुलझाया
Eknath Shinde Stops Convoy: एकनाथ शिंदे ने दिव्यांग महिला के लिए रोका काफिला। बेटे की नौकरी का मुद्दा फोन पर तुरंत सुलझाया और अधिकारी को लगाई फटकार।
- Written By: अनिल सिंह
एकनाथ शिंदे ने बीच सड़क पर सुनी दिव्यांग महिला की व्यथा, फोन पर अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश (फोटो क्रेडिट-X)
Eknath Shinde Stops Convoy For Divyang Woman: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अक्सर अपनी “आम आदमी” की छवि और जनता के प्रति अपने जुड़ाव के लिए चर्चा में रहते हैं। मंगलवार, 5 मई को मंत्रालय में कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई थी। इस बैठक के बाद जब उपमुख्यमंत्री अपने सरकारी आवास ‘नंदनवन’ की ओर लौट रहे थे, तब मंत्रालय के पास एक ऐसी घटना घटी जिसने एक बार फिर उनकी संवेदनशीलता को जगजाहिर कर दिया। शिंदे का काफिला मंत्रालय से बाहर निकल ही रहा था कि भीड़ में खड़ी एक दिव्यांग महिला ने उन्हें अपनी समस्या बताने के लिए जोर से आवाज लगाई।
आमतौर पर सुरक्षा कारणों से मंत्रियों का काफिला बीच सड़क पर नहीं रुकता है, लेकिन एकनाथ शिंदे ने जैसे ही उस महिला की पुकार सुनी, उन्होंने तुरंत अपने ड्राइवर को गाड़ी रोकने का आदेश दिया। वे न केवल रुके, बल्कि खुद गाड़ी से उतरकर उस महिला के पास पहुँचे और बड़े ही शांत स्वभाव से उनकी पूरी बात सुनी। महिला काफी समय से अपने बेटे के लिए रोजगार की तलाश में भटक रही थी और उसने भावुक होकर उपमुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई।
मौके पर ही अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
उपमुख्यमंत्री ने दिव्यांग महिला की समस्या को सुनने के बाद उसे केवल आश्वासन देकर नहीं छोड़ा, बल्कि तुरंत एक्शन मोड में आ गए। उन्होंने मौके पर ही संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को अपने मोबाइल से फोन मिलाया। शिंदे ने अधिकारियों को फोन पर स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि इस महिला की समस्या का तुरंत समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला के बेटे की योग्यता के अनुसार उसे जल्द से जल्द रोजगार दिलाने के लिए हर संभव प्रशासनिक मदद उपलब्ध कराई जाए।
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लापरवाह अधिकारी को फोन पर लगाई फटकार
इस बातचीत के दौरान एक दिलचस्प और कड़ा मोड़ तब आया जब फोन की दूसरी तरफ मौजूद अधिकारी ने शायद कुछ स्पष्टीकरण देने या बीच में टोकने की कोशिश की। इस पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे काफी नाराज हो गए। उन्होंने अधिकारी को डांटते हुए कहा कि जब कोई जरूरतमंद व्यक्ति अपनी फरियाद लेकर आता है, तो प्रशासनिक पेचीदगियों के बजाय उसकी मदद करना प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका यह सख्त अंदाज वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया, जिससे यह साफ संदेश गया कि जनता के काम में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आम आदमी की सरकार होने का दिया प्रमाण
एकनाथ शिंदे के इस मानवीय व्यवहार ने मौके पर मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया। महिला ने अपनी आँखों में आंसू लेकर उपमुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जहाँ लोग शिंदे के इस त्वरित निर्णय और संवेदनशीलता की प्रशंसा कर रहे हैं। यह घटना साबित करती है कि यदि शासन और प्रशासन के शीर्ष पर बैठे लोग संवेदनशील हों, तो आम नागरिक को न्याय के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
