18 से डॉक्टर हड़ताल पर! इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की सरकारी अधिसूचना के खिलाफ चेतावनी
Mumbai News: आईएमए महाराष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार होम्योपैथिक डॉक्टरों के एलोपैथिक पंजीकरण को वापस नहीं लेती, तो 18 सितंबर को राज्यव्यापी हड़ताल होगी।
- Written By: सोनाली चावरे
18 से डॉक्टर हड़ताल पर (pic credit; social media)
Doctors strike: इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) महाराष्ट्र शाखा ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि अगर आधुनिक औषधि विज्ञान में सर्टिफिकेट कोर्स पूरा करने वाले होम्योपैथिक डॉक्टरों के पंजीकरण संबंधी नई सरकारी अधिसूचना को वापस नहीं लिया गया तो 18 सितंबर को डॉक्टरों की हड़ताल शुरू हो जाएगी।
इस साल की शुरुआत में राज्य सरकार ने महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) को निर्देश दिया था कि वे एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स (सीसीएमपी) पूरा करने वाले होम्योपैथिक डॉक्टरों का पंजीकरण करें। इस निर्णय के तहत इन डॉक्टरों को कुछ मामलों में एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति मिली। लेकिन 5 सितंबर को जारी नए सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के बाद, आईएमए ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
आईएमए का कहना है कि यह सरकारी फैसला स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। संगठन ने सरकार से अपील की है कि जब तक बॉम्बे हाईकोर्ट में इस संबंध में लंबित मामले का फैसला नहीं आता, तब तक पंजीकरण संबंधी कोई भी निर्णय लागू न किया जाए।
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आईएमए महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ. संतोष कदम ने कहा कि अगर सरकार आदेश वापस नहीं लेती है, तो 18 सितंबर को राज्यव्यापी सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। इस दौरान सभी स्वास्थ्य सेवाएं 24 घंटे बंद रहेंगी। उन्होंने कहा कि संगठन ने पहले 11 जुलाई को भी हड़ताल का आह्वान किया था, लेकिन मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया था।
आईएमए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवकुमार उत्तुरे ने बताया कि जुलाई में मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सरकार ने पंजीकरण अधिसूचना वापस ले ली थी। लेकिन अब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद महाराष्ट्र सरकार ने एमएमसी में होम्योपैथिक डॉक्टरों का पंजीकरण फिर से शुरू किया, जो संगठन को स्वीकार्य नहीं है।
आईएमए ने यह स्पष्ट किया कि हड़ताल केवल विरोध के लिए नहीं है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है। संगठन ने स्वास्थ्य कर्मियों से अपील की है कि वे इस आंदोलन में शामिल हों और सरकार पर दबाव डालें।
इस कदम के बाद पूरे महाराष्ट्र में सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवाओं में सामान्य सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है। आईएमए का कहना है कि उनका उद्देश्य मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करना है और इसी के लिए उन्होंने हड़ताल का निर्णय लिया है।
