Virar में सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी, 4 लोगों पर धोखाधड़ी का आरोप
Mumbai के विरार में सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी का मामला सामने आया है। जिसके अंतर्गत 4 लोगों के खिलाफ पावर ऑफ अटॉर्नी में बदलाव कर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की गई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
पावर ऑफ अटॉर्नी (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: विरार में सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी कर धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है। प्रभारी संयुक्त उप पंजीयक प्रीतम सुनील मोरे ने विकास भास्कर वर्तक, निन्नम विकास वर्तक, वेदांत विकास वर्तक और काशीनाथ गोविंद पाटिल के खिलाफ विरार पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है।
इन सभी पर मूल मुख्तारनामा (पावर ऑफ अटॉनी) में हस्तलिखित बदलाव कर उसे आधार बनाकर दस्तावेजों का पंजीकरण करवाने और सरकारी अधिकारियों को गुमराह करने का आरोप है।
इस शिकायत पर विरार पुलिस ने 13 अक्टूबर 2025 को धारा 420, 465, 467, 468, 471, 34 तथा महाराष्ट्र पंजीकरण अधिनियम की धारा 82 के तहत मामला दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि विकास वर्तक वसई-विरार की एक प्रतिष्ठित निर्माण कंपनी से जुड़े हुए है, जबकि काशीनाथ गोविंद पाटिल शिरसाड के एक किसान हैं।
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मुख्तारनामे में जोड़ दिए गए नए नाम और रकबे
- पुलिस के अनुसार, अगाशी-चलपेठे निवासी बर्तक परिवार ने वसई-2 (विरार पूर्व स्थित संयुक्त उप पंजीयक कार्यालय में भूमि क्रय से जुड़े तीन विलेख पंजीकृत कराए थे। इन दस्तावेजों में प्रयुक्त स्टाम्प पेपर और मुख्तारनामा वर्ष 2004 का था। लेकिन उसमें हस्तलिखित रूप से नए नाम और भूमि के रकबे जोड़ दिए गए थे।
- भूमि मालिक बेबीबाई मोतीराम पाटिल, विजया काशीनाथ पाटिल और अलका जयवंत भोईर ने काशीनाथ गोविद पाटिल को कोई पावर ऑफ अटॉनी नहीं दी थी, बावजूद इसके उनके नाम मुख्तारनामे में जोड़ दिए गए।
- यही दस्तावेज बाद में विलेख पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया गया, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज हो गई। संयुक्त उप पंजीयक मोरे ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस प्रकार के फेरबदल से न केवल पंजीयन अधिकारियों को गुमराह किया गया बल्कि सरकार को भी धोखा दिया गया है।
