Dharavi Redevelopment Project: 14 मई से 13 दिन तक लगेंगे डॉक्यूमेंटेशन कैंप, पेंडिंग मामलों का होगा समाधान
Dharavi Redevelopment Project के तहत 14 से 26 मई तक विशेष डॉक्यूमेंटेशन कैंप लगाए जाएंगे। इन शिविरों में पेंडिंग मामलों के दस्तावेजों की जांच और सत्यापन कर पात्र निवासियों को राहत देने की कोशिश होगी।
- Written By: अपूर्वा नायक
धारावी रीडेवलपमेंट डॉक्यूमेंटेशन कैंप (सौ. सोशल मीडिया )
Dharavi Redevelopment Project Documentation Camp: धारावी के स्थानीय नगरसेवकों के सहयोग से पहली बार सभी निवासियों के अनिर्णीत (पेंडिंग) मामलों के निपटान के लिए 13 दिन तक डॉक्यूमेंटेशन कैम्प आयोजित किए जाने की घोषणा की गई है।
ये कैम्प 14 से 26 मई के बीच सिंगल-विंडो वेरिफिकेशन के लिए आयोजित किए जाएंगे, जिनमें रेलवे की जमीन सहित सभी 5 सेक्टरों के निवासियों को शामिल किया जाएगा। इन कैम्प में धारावी पुनर्विकास परियोजना (डीआरपी) के अधिकारी पेंडिंग या ‘अनिर्णीत’ मामलों के त्वरित समाधान के लिए, दस्तावेजों की जांच, सत्यापन और जमा करने से संबंधित सवालों में निवासियों की मदद करेंगे।
इस पहल के लिए डीआरपी ने स्थानीय नगरसेवकों के साथ एक बैठक आयोजित की। इस बैठक में मौजूद पार्षदों में भास्कर शेट्टी (शिवसेना), अर्चना शिंदे, जोसेफ़ कोली और हर्षला मोरे (सभी शिवसेना-यूबीटी) के साथ-साथ कांग्रेस नेता आशा काले और साजिदाबी बब्बू खान शामिल हुए।
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शिविर में आने के लिए प्रोत्साहित करें
- नगरसेवकों से बात करते हुए, डीआरपी के सचिव विपिन पालीवाल ने इस पहल का स्वागत किया और उनसे आग्रह किया कि वे अपने-अपने वार्डों के उन निवासियों को, जिनके मामले ‘अनसुलझे’ स्थिति में हैं, इन शिविर में आने के लिए प्रोत्साहित करें।
- पालीवाल ने आगे कहा कि यह सभी के लिए आवास उपलब्ध कराने की परियोजना है और हम चाहते हैं कि हर वास्तविक निवासी को पुनर्विकास परियोजना के तहत घर मिले। यह बैठक डीआरपी और एसआरए के सीईओ डॉ। महेंद्र कल्याणकर के निर्देशों के अनुसार आयोजित की गई थी, ताकि स्थानीय नगरसेवकों को इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी जा सके और पेंडिंग मामलों के लिए कैम्प आयोजित करने में उन्हें शामिल किया जा सके।
अभी तक 90% मामलों का हुआ निपटान
डीआरपी सचिव पालीवाल ने कहा कि बड़ी संख्या में पेंडिंग मामले बीएमसी फोटोपास में लिखी तारीख को लेकर हुई गलतफहमी के कारण सामने आए थे। ऐसे लगभग 90% मामले पहले ही सुलझा लिए गए हैं और बाकी मामलों पर काम चल रहा है।
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पात्रता का निर्णय दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद ही किया जाएगा। पालीवाल के अनुसार, जहां झुग्गियां कई बार बेची-खरीदी गई हैं, वहां मालिकाना हक के डॉक्यूमेंट्स की पूरी कड़ी उपलब्ध नहीं है। डॉक्यूमेंट्स की पूरी कड़ी के बिना, डीआरपी न तो उस ढांचे को मान्य कर सकता है, न ही मालिकाना हक के इतिहास का वेरिफिकेशन कर सकता है, और न ही मौजूदा झुग्गी-धारक की पात्रता निर्धारित कर सकता है।
