मनोरंजन के नाम पर अपमान बर्दाश्त नहीं: 370 रुपये की बिरयानी विवाद पर सीएम देवेंद्र फडणवीस का कड़ा रुख
Devendra Fadnavis Statement: 370 रूपये की बिरयानी विवाद में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब सामाजिक मर्यादाओं को तोड़ना नहीं है।
- Written By: गोरक्ष पोफली
देवेंद्र फडणवीस और प्रणित मोरे (सोर्स: सोशल मीडिया)
Devendra Fadnavis Statement On 370 Biryani Controversy: हाल ही में स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे और उनके सहयोगियों से जुड़ा 370 रुपये की बिरयानी विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक मर्यादाओं के बीच के संतुलन को रेखांकित करता है।
विवाद की पृष्ठभूमि और कानूनी कार्रवाई
यह पूरा विवाद एक स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान शुरू हुआ, जहाँ हिमांशु जांगड़ा ने अपने एक डेटिंग अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने एक लड़की को 370 रुपये की बिरयानी खिलाई थी और बदले में शारीरिक संबंध की उम्मीद की थी। इस टिप्पणी के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद व्यापक आलोचना हुई। परिणाम स्वरूप, राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया और प्रणित मोरे तथा हिमांशु जांगड़ा को तलब किया। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने के आरोप में प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा और सेजल पवार के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत गरिमा के बीच एक स्पष्ट लकीर खींची है। उनके बयान के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है, लेकिन साथ ही इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कुछ सुरक्षात्मक उपाय भी निर्धारित करता है। उनके अनुसार, स्वतंत्रता का अर्थ स्वच्छंदता नहीं है।
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#WATCH | Mumbai | On the Rs 370 biryani row, Maharashtra CM Devendra Fadnavis says, “The Constitution of India grants everyone the freedom of expression. However, it also establishes safeguards to ensure this freedom is not misused. When expression becomes unrestrained, it… pic.twitter.com/xaaFhKnUFD — ANI (@ANI) June 12, 2026
गरिमा के साथ जीने का अधिकार
फडणवीस ने जोर देकर कहा कि जब अभिव्यक्ति अमर्याद या अनियंत्रित हो जाती है, तो वह समाज के अन्य व्यक्तियों के गरिमा के साथ जीने के अधिकार पर प्रहार करती है। इस प्रकार का आक्रमण संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि स्टैंड-अप कॉमेडी मनोरंजन का एक अच्छा साधन है और वे स्वयं भी इसे देखना पसंद करते हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि मनोरंजन की आड़ में सामाजिक सीमाओं और मर्यादाओं का उल्लंघन करना कतई उचित नहीं है।
यदि मनोरंजन दूसरों के प्रति अपमानजनक हो जाए, तो वह ‘लोगों के ऊपर अन्याय’ के समान है। उन्होंने स्टैंड-अप कलाकारों से अपील की है कि वे अपनी प्रस्तुति के दौरान कम से कम गरिमा के न्यूनतम मापदंडों का ध्यान अवश्य रखें।
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रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी एक ही सिक्के के दो पहलू
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान इस ओर संकेत करता है कि रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उनके वक्तव्य से यह समझा जा सकता है कि जहाँ लोकतंत्र में व्यंग्य और हास्य का स्थान है, वहीं यह किसी की गरिमा को ठेस पहुँचाने या वस्तुकरण करने का लाइसेंस नहीं देता है। 370 रुपये बिरयानी जैसे विवाद यह याद दिलाते हैं कि यदि कलाकार स्वयं अपनी मर्यादा तय नहीं करेंगे, तो कानून और समाज को हस्तक्षेप करना पड़ता है। अंततः, स्वस्थ मनोरंजन वही है जो समाज को जोड़ने का काम करे, न कि किसी विशेष वर्ग या व्यक्ति की गरिमा को कम करके उसे अपमानित करे।
