गणपति बप्पा के मोदक पर महंगाई की मार, गणेशोत्सव में नारियल और अंबेमोहर चावल महंगे
Mumbai News: नारियल की कम आवक के कारण इस गणेशोत्सव में मोदक महंगे हो गए हैं, जिससे भक्तों को बप्पा के प्रिय भोग पर महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है।
- Written By: सोनाली चावरे
बप्पा के लिए नारियल मोदक महंगे ( pic credit; social media)
Maharashtra News: वाशी स्थित एपीएमसी बाजार में इस बार नारियल की आवक कम होने से इसकी कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। गणेशोत्सव के चलते नारियल की मांग अचानक बढ़ गई है, जिसके कारण थोक और खुदरा बाजार दोनों जगह दाम 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।
फिलहाल थोक बाजार में नारियल 28 से 65 रुपए प्रति नग बिक रहा है, जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमत 40 से 75 रुपए प्रति नग तक पहुंच गई है। इससे इस साल बप्पा को अर्पित किए जाने वाले मोदक पर महंगाई की सीधी मार पड़ी है।
व्यापारियों के अनुसार, दक्षिण भारत के राज्यों में इस साल मानसून के दौरान तेज गर्मी और कीटों के हमले की वजह से नारियल की पैदावार घटी है। पहले जहां एक पेड़ से करीब 100 नारियल मिलते थे, वहीं इस बार केवल 55 से 60 नारियल ही आ रहे हैं। इसी कारण बाजारों में आवक कम हो गई है। इसका असर सूखे नारियल (गरी) पर भी दिख रहा है। त्योहार से पहले जहां गरी 300 से 350 रुपए प्रति किलो बिक रही थी, वहीं अब इसकी कीमत 400 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है।
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इस बढ़ती महंगाई से गृहणियों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। घरों में पूजा, प्रसाद और मिठाइयों के लिए नारियल का उपयोग सबसे ज्यादा होता है, इसलिए नारियल महंगा होने से मोदक और अन्य नारियल आधारित मिठाइयों के दाम भी बढ़ गए हैं।
नारियल के साथ-साथ मोदक बनाने में इस्तेमाल होने वाले अंबेमोहर चावल की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। उकड़ी मोदक बनाने के लिए सबसे ज्यादा मांग इसी चावल की रहती है। पिछले साल की तुलना में इस साल अंबेमोहर चावल की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है। फिलहाल यह 75 से 150 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। इसके अलावा इंद्रायणी चावल 65 से 70 रुपए और बासमती चावल 80 से 150 रुपए किलो उपलब्ध है।
व्यापारियों का कहना है कि अंबेमोहर चावल की खेती करने वाले किसानों की संख्या लगातार कम हो रही है, जिससे इसका उत्पादन भी घट गया है। ऐसे में बढ़ती मांग के कारण इसके दामों में तेजी आई है।
गणपति बप्पा का प्रिय भोग मोदक है, लेकिन इस बार नारियल और चावल दोनों के महंगे होने से भक्तों को जेब ढीली करनी पड़ रही है।
