संजय शिरसाट (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Sanjay Shirsat Investigation: राज्य की सत्तारूढ़ महायुति में शामिल उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के नेता और सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। सिडको के प्लॉट के कथित स्कैम मामले में शिरसाट की भूमिका की जांच होनेवाली है।
शरद पवार की राकां के विधायक रोहित पवार द्वारा इस मामले को लगातार उठाए जाने के बाद राज्य सरकार ने कोंकण डिविजनल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है। यह कमेटी लगभग 4,500 करोड़ रुपए के कथित सिडको प्लॉट स्कैम की जांच करेगी।
यशवंत बिवलकर से जुड़े इस स्कैम में रोहित पवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि उस समय के सिडको चेयरमैन और मौजूदा मंत्री संजय शिरसाट ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करके गैर-कानूनी तरीके से जमीन सौंपी थी। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने इस मामले में केस दर्ज करने की अपील पुलिस से की थी। लेकिन इसके बाद भी करीब डेढ़ महीने तक कोई हलचल नहीं हुई।
आखिरकार, सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की सिफारिश के बाद, राज्य के चीफ सेक्रेटरी ने तुरंत एक मीटिंग की और एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया। इस कमेटी में चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (ठाणे), रायगढ़ डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, सिडको (सीआईडीसीओ) के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर और लैंड रिकॉर्ड्स अधिकारी शामिल हैं।
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विधायक रोहित पवार ने मामले की जांच के लिए गठित की गई हाई लेवल जांच कमेटी पर ही सवालिया निशान लगाया है। रोहित पवार ने कहा कि “जिस अधिकारी ने जमीन अलॉटमेंट की सिफारिश करते हुए लेटर लिखा था, उसी ने इस कमेटी का जीआर जारी किया है। साथ ही, जिस अधिकारी ने असल में जमीन अलॉट की थी, वही आज कमेटी का सेक्रेटरी है। ऐसी कमेटी को देखने बाद आज यही कह सकते हैं कि ‘चोर को ही पुलिस’ बना दिया गया है।” यह सरकार का अंधापन है और उन्होंने इस मामले की एक रिटायर्ड जज की देखरेख में इंडिपेंडेंट जांच की मांग की है।