पुणे मुंढवा जमीन घोटाला: तहसीलदार और रजिस्ट्रार नहीं होंगे बर्खास्त, क्या बच जाएंगे दागी अधिकारी?
Pune Land Scam: पुणे के मुंढवा में 300 करोड़ की सरकारी जमीन के अवैध सौदे में फंसे तहसीलदार सूर्यकांत येवले और सहायक निबंधक रवींद्र तारू पर अब विभागीय जांच के बाद ही गाज गिरेगी।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune Land Scam Departmental Inquiry: महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़े पुणे के मुंढवा में सरकारी जमीन के गैरकानूनी सौदे मामले में निलंबित तहसीलदार सूर्यकांत येवले और सहायक निबंधक रवींद्र तारू को बर्खास्त नहीं किया जाएगा। इसके बजाय अब उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी। इस प्रस्ताव को जिला प्रशासन और पंजीकरण एवं मुद्रांक शुल्क विभाग द्वारा राज्य सरकार को भेजा गया है। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर ही दोनों अधिकारियों को बर्खास्त किया जाएगा।
क्या है मामला?
मुंढवा में बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया की 40 एकड़ जमीन 300 करोड़ रुपये में बेची गई थी। इस सौदे में पार्थ पवार के साझेदार अमेडिया इंटरप्राइजेज के साझेदार दिग्विजयसिंह पाटिल और कुलमुखधारक शीतल तेजवानी शामिल थे। इस सौदे की दस्तावेजीकरण प्रक्रिया में कई नियमों की अनदेखी की गई थी।
महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले की जांच के लिए राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खारगे की समिति बनाई थी। समिति ने दस्तावेजों की पड़ताल के बाद दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफ़ारिश की थी। प्रारंभ में सुझाव था कि गंभीर त्रुटियों के बावजूद सौदा पूरा होने के कारण सीधे बर्खास्ती की जाए। हालांकि, अब निर्णय लिया गया है कि सूर्यकांत येवले और रवींद्र तारू के खिलाफ विभागीय जांच की जाएगी।
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राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह पंजीकरण एवं मुद्रांक शुल्क और जिला प्रशासन से विभागीय जांच का प्रस्ताव मांगा था। दोनों विभागों ने यह प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है। जांच के दौरान दोनों अधिकारी अपनी ओर से बयान दे सकेंगे।
रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद ही बर्खास्त का निर्णय
जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे जाने के बाद ही उनके बर्खास्तगी संबंधी निर्णय लिए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, राजस्व अधिकारियों ने संवेदनशील मामलों में किसी अधिकारी की गलती न होने पर भी सीधे बर्खास्तगी से बचाने के लिए विभागीय जांच कराना जरूरी माना है, ताकि भविष्य में अधिकारियों की मानसिकता पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
