हकीकत बनने जा रहा साइंस फिक्शन! अंतरिक्ष से वायरलेस बिजली भेजने की दिशा में चीन को मिली बड़ी कामयाबी
Mumbai Space Solar Power: चीनी वैज्ञानिकों ने लंबी दूरी तक वायरलेस बिजली भेजने वाली तकनीक का सफल परीक्षण किया है। इसे अंतरिक्ष आधारित सौर ऊर्जा परियोजनाओं की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
- Written By: अंकिता पटेल
वायरलेस बिजली, सौर ऊर्जा, अंतरिक्ष तकनीक, (सोर्स: सौजन्य AI)
Mumbai Wireless Power Transmission: मुंबई ज्यादातर साइंस फिक्शन तक ही सीमित एक भविष्यवादी विचार अब वास्तविकता के बेहद करीब आता दिख रहा है। यह विचार है पृथ्वी की कक्षा में घूमते सोलर पावर स्टेशन से वायरलेस तरीके से पृथ्वी पर बिजली भेजना। चीनी शोधकर्ताओं ने सफलतापूर्वक एक ऐसे सिस्टम का परीक्षण किया है, जो एक ही समय में कई चलती-फिरती चीजों तक बिजली पहुंचाने में सक्षम है। शियान में जिडियन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक वायरलेस पावर ट्रांसमिशन प्लेटफॉर्म विकसित किया है।
यह प्लेटफॉर्म चलती-फिरती चीजों को सटीक रूप से ट्रैक कर लंबी दूरी तक किलोवॉट स्तर की माइक्रोवेव एनर्जी भेज सकता है। इस सफलता को चीन की उन दीर्घकालिक महत्वाकांक्षाओं की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिनके तहत वह अंतरिक्ष आधारित सोलर पावर स्टेशन बनाना चाहता है। ये स्टेशन पृथ्वी की कक्षा में एनर्जी इकट्ठा करेंगे और उसे वायरलेस तरीके से सैटेलाइट, ड्रोन, चंद्रमा पर बने बेस और शायद पृथ्वी तक भी भेजेंगे।
ऐसे काम करेगा सिस्टम
इस प्रोजेक्ट के केंद्र में 75 मीटर ऊंचा एक टावर है। इसे एक ग्राउंड वेरिफिकेशन प्लेटफॉर्म के हिस्से के तौर पर बनाया गया है। इसका मकसद कक्षा में तैनात करने से पहले अंतरिक्ष-आधारित एनर्जी ट्रांसमिशन की पूरी प्रक्रिया का सिमुलेशन यानी नकली परीक्षण करना है। इस सिस्टम ने लगभग 100 मीटर की दूरी तक 1,180 वॉट बिजली भेजी और साथ ही माइक्रोवेव बीम पर सटीक कंट्रोल भी बनाए रखा।
सम्बंधित ख़बरें
महाराष्ट्र में ग्राम पंचायत चुनाव का काउंटडाउन, 14,237 गांवों होगा महासंग्राम! 12 जून को निकलेगी आरक्षण लॉटरी
मुंबई में गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड परियोजना को गति देने के लिए बीएमसी का एक्शन, 150 अवैध निर्माण ध्वस्त
अहिल्यादेवी जयंती कार्यक्रम में सीएम देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान, मराठा समाज को कही ये बात
यवतमाल के उमरगांव में गहराया जलसंकट, ग्रामीण 2.5 किमी दूर से ला रहे पानी
यह भी पढ़ें:-अहिल्यादेवी जयंती कार्यक्रम में सीएम देवेंद्र फडणवीस का बड़ा बयान, मराठा समाज को कही ये बात
शोधकर्ताओं ने 30 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ रहे एक चलते-फिरते ड्रोन को भी सफलतापूर्वक बिजली दी। उन्होंने लगभग 30 मीटर की दूरी से 143 वॉट बिजली भेजी, चलती फिरती चीजों को लगातार ट्रैक करने और उन्हें बिजली देने की यह क्षमता वायरलेस एनर्जी ट्रांसमिशन सिस्टम में आने वाली सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक मानी जाती है। इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व वरिष्ठ इंजीनियर डुआन बाओयान कर रहे है।
