15-20 दिन पहले फैसला होता तो नहीं बिगड़ते हालात… धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले छगन भुजबल
Chhagan Bhujbal Statement: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर छगन भुजबल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि यह फैसला 15-20 दिन पहले लिया जाता तो देशभर में तनाव नहीं बढ़ता।
- Written By: गोरक्ष पोफली
छगन भुजबल (सोर्स: सोशल मीडिया)
Chhagan Bhujbal Reaction On Dharmendra Pradhan: महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और हालिया छात्र आंदोलन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि यह फैसला पहले लिया गया होता, तो देशभर में इतना तनाव पैदा नहीं होता।
उन्होंने कहा कि जनता की नाराजगी दूर करने के लिए संवाद और लोगों की बात सुनना सबसे जरूरी है।
15-20 दिन पहले इस्तीफा देते तो अलग होते हालात
छगन भुजबल ने मीडिया से कहा, अगर यह इस्तीफा पहले हो जाता, तो जो तनावपूर्ण स्थिति बनी, वह नहीं बनती। जो इस्तीफा उन्होंने शनिवार को दिया, अगर वही 15-20 दिन पहले दे देते तो हालात अलग होते। सोनम वांगचुक को 26 दिनों तक अनशन करना पड़ा। इन सभी घटनाओं का गुस्सा लोगों में साफ दिखाई दिया।
सम्बंधित ख़बरें
Gondia News: गोंदिया में स्कूल से बाहर बच्चों की तलाश, शिक्षा विभाग चला रहा विशेष सर्वे अभियान
VEDIO: नासिक में आसमानी आफत, गोदावरी के रौद्र रूप से पुराने शहर में तबाही, 50 से अधिक दुकानों में घुसा पानी
Yavatmal News: यवतमाल के वणी में खस्ताहाल पुलिस स्टेशन बना खतरा, विधायक से नए भवन की मांग
Akola News: पातुर में बीज अंकुरित नहीं होने पर कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई, दो कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज
उन्होंने कहा कि यह केवल दिल्ली के जंतर-मंतर तक सीमित मामला नहीं है। यह उदाहरण सिर्फ जंतर-मंतर के लिए नहीं बल्कि नासिक, महाराष्ट्र और पूरे देश के लिए है। लोगों की बात सुननी चाहिए और उनके साथ लगातार संवाद होना चाहिए।
नीट-यूजी विवाद और दिल्ली में भारी विरोध प्रदर्शन
बता दें कि धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में छात्रों के नेतृत्व में कई सप्ताह तक बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और जन आंदोलन चला। प्रदर्शनकारी नीट-यूजी पेपर लीक विवाद समेत परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों को लेकर जवाबदेही तय करने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उस समय आया, जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर देशभर में आलोचना तेज हो गई थी।
यह भी पढ़ें: VEDIO: नासिक में आसमानी आफत, गोदावरी के रौद्र रूप से पुराने शहर में तबाही, 50 से अधिक दुकानों में घुसा पानी
सोनम वांगचुक का अनशन और पुलिस कार्रवाई
इस आंदोलन को और गति तब मिली, जब 18 जुलाई की सुबह जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं, चिकित्सकीय सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें अस्पताल ले जाया था। सोनम वांगचुक भी जवाबदेही तय करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे।
