मनोनीत सदस्यों की चयन प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के आदेश, भंडारा जिलाधिकारी ने जारी किए निर्देश
Tumsar Municipal Council: तुमसर नगर परिषद में मनोनीत सदस्यों की विवादित नियुक्ति रद्द कर जिलाधिकारी ने नियमों के अनुसार नई चयन प्रक्रिया तत्काल शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Tumsar municipal council news (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bhandara District Collector: राज्य के शहरी विकास विभाग की ओर से जारी कड़े निर्देशों के बाद जिलाधिकारी ने 12 फरवरी को तुमसर नगर परिषद के मुख्याधिकारी को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र के माध्यम से 16 जनवरी को की गई मनोनीत सदस्यों की विवादास्पद नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द करने तथा नियमों के अनुसार नई चयन प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। शासन के इस कड़े रुख से स्थानीय राजनीति में हलचल मच गई है।
जिलाधिकारी कार्यालय को शहरी विकास विभाग, मंत्रालय मुंबई के उप सचिव से प्राप्त संदर्भ पत्र के अनुसार, पूर्व में की गई नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच में स्पष्ट हुआ कि पिछली चयन प्रक्रिया महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगर अधिनियम 1965 की धारा 63 तथा नियुक्ति विधि नियम 2010 (संशोधित 2012) के प्रावधानों के अनुरूप नहीं थी।
शासन ने दिए नए निर्देश
नियमों का उल्लंघन पाए जाने के कारण शासन ने पुरानी सूची को निरस्त करते हुए नए सिरे से आम सभा आयोजित करने का निर्देश दिया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब मनोनीत सदस्यों के चयन के लिए विशेष आम सभा की तिथि और समय निर्धारित किया जाएगा।
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पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संबंधित गुट नेताओं और पार्टी प्रमुखों को अपने उम्मीदवारों के नामांकन पत्र जिला संयुक्त आयुक्त (जिला प्रशासन अधिकारी) के पास सभा से कम से कम 24 घंटे या दो दिन पहले जमा कराने होंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस बार पूरी प्रक्रिया कानूनी मापदंडों के अनुसार ही संपन्न की जानी चाहिए।
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हाईकोर्ट में याचिका दाखिल
वर्तमान उपाध्यक्ष और 11 सदस्यीय गुट के नेता सचिन बोपचे ने इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। याचिका में नगराध्यक्ष पर अधिकारों के दुरुपयोग और दुर्भावनापूर्ण तरीके से निर्णय लेने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शहरी विकास मंत्रालय का यह नया आदेश न्यायालय में चल रहे मामले के लिए एक महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है, जिससे नगराध्यक्ष की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
