BMC में स्वदेशी बनाम विदेशी की जंग: PM मोदी की अपील का कोई असर नहीं, स्कॉर्पियो छोड़ इनोवा मांग रहे नगरसेवक
Maharashtra BMC Vehicle Row: बीएमसी में स्कॉर्पियो की जगह इनोवा क्रिस्टा गाड़ियों के प्रस्ताव पर विवाद। आदित्य ठाकरे ने साधा निशाना, भाजपा नेता गणेश खणकर ने दी सफाई।
- Written By: रूपम सिंह
स्कॉर्पियो सांकेतिक फोटो (सोर्स- सोशल मीडिया)
Maharashtra BMC Swadeshi vs Foreign Vehicles: एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशवासियों से स्वदेशी अपनाने की अपील करते है, ताकि भारतीय कंपनियों व उद्योगों को बढ़ावा मिल सके, लेकिन दूसरी तरफ उनके इस अपील से भाजपा नेताओं को कोई फर्क नहीं पड़ता है। भाजपा के कई नेता यूं तो लोगों को स्वदेशी अपनाने को कहते हैं, लेकिन जब खुद की बारी आती है, तो उन्हें विदेशी वस्तुएं ही पसंद आती है।
विपक्ष का कहना है कि भाजपा नगरसेवक व सदन नेता गणेश खणकर ने जनप्रतिनिधियों के 6 महत्त्वपूर्ण पदों के लिए महिन्द्रा स्कॉर्पियो के बदले टोयोटा इनोवा क्रिस्टा गाड़ी की मांग है। बता दें कि महिंद्रा स्वदेशी यानी भारतीय कंपनी है और वही टोयोटा जापान की कंपनी है।
एक टोयोटा इनोवा क्रिस्टा की कीमत लगभग 25 लाख से 40 लाख रुपये के बीच है, जबकि महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन की कीमत लगभग 30 लाख रुपये तक है। गौरतलब है कि बीएमसी का कहना है कि यह कदम उन्हें अधिक आराम उपलब्ध कराने के लिए उठाया जा रहा है। महापौर रितू तावड़े खुद इनोवा हाईक्रोस गाड़ी का इस्तेमाल करती हैं, जिसकी कीमत 40 लाख रुपये तक हो सकती है।
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पुरानी स्कॉर्पियो का इस्तेमाल करेंगे
वार्ड अधिकारी बीएमसी लगभग 1.5 करोड़ रुपये की लागत से टोयोटा इनोवा क्रिस्टा खरीदने का प्रस्ताव लाने वाली है। इन वाहनों से वर्तमान में इस्तेमाल की जा रही महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन को बदला जाएगा। नए वाहन जिन पदाधिकारियों को दिए जाने की योजना है, उनमें उपमहापौर संजय घाडी, सदन के नेता गणेश खणकर (भाजपा), विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर (शिवसेना-यूबीटी), स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे (भाजपा), शिक्षा समिति की अध्यक्ष राजेश्री शिरवाडकर (भाजपा) और सुधार समिति के अध्यक्ष संध्या दोशी (शिवसेना) शामिल हैं।
गाड़ियां खरीदी नहीं, वेटलीज पर ली जा रही
बीएमसी के एक अधिकारी ने दावा किया कि इसमें कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होगा। बीएमसी ने पांच वर्ष के लिए स्कॉर्पियो वाहन खरीदे थे। इनमें से कुछ समिति अध्यक्षों को दिए गए थे और बाकी वार्ड अधिकारियों को। कई वार्ड अधिकारियों को नए वाहन नहीं मिल पाए थे और उन्हें पुराने वाहन इस्तेमाल करने पड़े।
समिति अध्यक्षों से हटाई जाने वाली स्कॉर्पियो गाड़ियां वार्ड स्तर के अधिकारियों को दे दी जाएंगी। बीएमसी की गाड़ियां खरीदी नहीं, वेटलीज पर ली जा रही है। वहीं खणकर का कहना है कि कोई नई गाड़ियां खरीदी नहीं जा रही हैं, बल्कि यह प्रक्रिया वेट लीज यानी भाड़े के करार के तहत चल रही है।
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मुझे गाड़ियों का शौक नहीं
सदन के नेता गणेश खणकर ने कहा कि उन्होंने साफ किया कि बीएमसी के 24 प्रशासनिक वाडों के अधिकारियों, 17 उपायुक्त और विभिन्न संवैधानिक समितियों के अध्यक्षों (जैसे महापौर, उपमहापौर, स्थायी समिति आदि) को दी जाने वाली गाड़ियां ‘वेट लीज’ मॉडल पर ली जाती हैं। इन गाड़ियों का किराया भाड़े पर होता है, जबकि ईंधन और ड्राइवर का प्रबंधन बीएमसी द्वारा किया जाता है। अपने ऊपर लगे व्यक्तिगत आरोपों का जवाब देते हुए सभागृह नेता ने कहा, मुझे गाड़ियों का कोई शौक नहीं है। मैं सप्ताह में कई दिन लोकल ट्रेन से सफर करता हूं।
विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने कहा कि हमने आधिकारिक गाडी बदलने की कोई मांग नहीं की है। जब मुझे इस वर्ष विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था, तभी नई गाड़ी दी गई थी। यह अभी नई है और इसे बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है।
विधायक आदित्य ठाकरे ने कहा कि सिर्फ 6 महीने भी सता में नहीं हुए और नखरे शुरू हो गए। पिछले चार वर्षों में बीएमसी का खजाना वैसे ही खाली कर दिया गया और अब बीजेपी के महापौर, शिंदे गुट के उपमहापौर और स्थायी समिति के अध्यक्ष नई गाड़ियां और सरकारी बंगले की मांग कर रहे हैं। वीआईपी संस्कृति अपनी जगह है, लेकिन इनके नखरे तो देखिए, कहते हैं कि उन्हें दूर से आना पड़ता है, सड़कें गड्ढों से भरी है और ट्रैफिक बहुत है।
मुंबई के लाखों लोग रोज़ लोकल ट्रेन से सफर करते हैं, लेकिन बीजेपी 12 साल में उनकी व्यवस्था तक नहीं सुधार सकी। ये लोग मेट्रो से सफर नहीं करेंगे और हमारी बेस्ट सेवा को बंद कर निजी ठेकेदारों के हवाले करना चाहते हैं। आखिर ये सभी लोग बेस्ट बसों से क्यों नहीं आते? ट्रेन से सफर क्यों नहीं करते?
– नवभारत लाइव के लिए मुंबई से ब्रिजेश पाठक की रिपोर्ट
