Eknath Shinde And devendra Fadnavis (फोटो क्रेडिट-X)
Shiv Sena BMC Mayor: मुंबई महानगरपालिका (BMC) के सत्ता गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। महायुति (महागठबंधन) ने मुंबई के प्रतिष्ठित महापौर पद के बंटवारे को लेकर एक नया फॉर्मूला तय किया है, जिसे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह सहमति बनी है कि 5 साल के कार्यकाल में से डेढ़ साल (18 महीने) के लिए शिवसेना का महापौर होगा। यह निर्णय 29 जनवरी को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच हुई गोपनीय बैठक के बाद लिया गया है, जिसका उद्देश्य गठबंधन के भीतर समन्वय को मजबूत करना है।
हाल ही में संपन्न हुए बीएमसी चुनाव 2026 के परिणामों ने मुंबई की राजनीति को एक नया मोड़ दिया था। भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि शिंदे की शिवसेना ने 29 सीटें जीतकर गठबंधन को बहुमत के आंकड़े (114) के पार पहुँचाया। हालांकि, महापौर पद को लेकर दोनों दलों के बीच खींचतान चल रही थी, जिसे अब ‘डेढ़ साल के फॉर्मूले’ के जरिए सुलझा लिया गया है। वर्तमान में भाजपा की ऋतु तावड़े मुंबई की महापौर हैं, लेकिन इस नए समझौते के तहत उन्हें अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ना होगा।
इस नए राजनीतिक समीकरण के तहत, भाजपा ने अपने सहयोगी दल शिवसेना को संतुष्ट करने के लिए महापौर की कुर्सी साझा करने का बड़ा फैसला लिया है। रितु तावड़े, जो वार्ड नंबर 132 से पार्षद हैं और वर्तमान में महापौर पद की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, डेढ़ साल का समय पूरा होने के बाद इस्तीफा देंगी। इसके बाद अगले 18 महीनों के लिए शिंदे गुट का कोई पार्षद मुंबई का नया प्रथम नागरिक बनेगा। इस समझौते में न केवल महापौर पद, बल्कि नगर निगम की विभिन्न वैधानिक समितियों (Statutory Committees) की अध्यक्षता का भी समान वितरण किया गया है।
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बीएमसी के चुनाव परिणामों ने इस बार कई स्थापित समीकरणों को बदल दिया। पहली बार भाजपा 89 पार्षदों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई। वहीं, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) 65 सीटों पर सिमट गई, जबकि राज ठाकरे की मनसे (MNS) को केवल 6 सीटें मिलीं। शिंदे की शिवसेना की 29 सीटें महायुति की सत्ता सुनिश्चित करने के लिए ‘किंगमेकर’ साबित हुईं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिंदे अपनी पार्टी के लिए मुंबई में एक प्रभावशाली भूमिका सुनिश्चित करना चाहते थे, जिसमें वे सफल होते दिख रहे हैं।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिंदे की शिवसेना से वह भाग्यशाली पार्षद कौन होगा जिसे मुंबई का महापौर बनने का अवसर मिलेगा। महापौर का पद वर्तमान में ‘सामान्य महिला’ वर्ग के लिए आरक्षित है, ऐसे में शिवसेना के भीतर महिला पार्षदों के नामों पर मंथन शुरू हो गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कदम से आगामी विधानसभा चुनावों से पहले शिवसेना (शिंदे गुट) के कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और मुंबई पर उनकी पकड़ और भी मजबूत होगी। प्रशासन में समन्वय सुनिश्चित करने के लिए दोनों दलों ने समितियों के अध्यक्ष पदों के लिए भी एक साझा सूची तैयार की है।