बीएमसी महापौर (सौ. डिजाइन फोटो )
Mumbai News In Hindi: बीएमसी के महापौर चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। आज यानी सोमवार को बीजेपी, शिवसेना शिंदे गुट व राकां कोंकण भवन जाकर पंजीकरण करने वाले हैं।
गौरतलब है कि बीजेपी व शिवसेना पहले एक साथ पंजीकरण करने वाले थे, लेकिन अब यह खबर है कि दोनों अलग अलग पंजीकरण करने वाले हैं।
जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों का मानना है कि राको (एनसीपी) ने अहम फैसला लेते हुए एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने का ऐलान किया है।
राकां के इस कदम से बीएमसी की राजनीति में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं, वहीं बीएमसी में शिंदे बीजेपी पर साफ – तौर पर दबाव बना रहे हैं और इससे स्पष्ट होता है कि शिंदे बीजेपी का हर फैसला मानने को बाध्य नहीं हैं।
जानकारी के अनुसार, बीएमसी चुनाव में एनसीपी ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा था और अजित पवार गुट के तीन नगरसेवक निर्वाचित हुए थे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि चुनाव परिणाम सामने आने के बाद एनसीपी के नगरसेवक भाजपा की बजाय शिंदे गुट की शिवसेना को समर्थन देंगे। इस निर्णय के पीछे गठबंधन स्तर पर हुए मतभेदों को एक अहम कारण माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले महायुति के भीतर बीएमसी चुनाव को लेकर चर्चा के दौरान भाजपा ने एनसीपी नेता नवाब मलिक के नाम पर आपत्ति जताई थी। इसी कारण एनसीपी ने अलग रास्ता अपनाने का फैसला किया और स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरी, अब चुनाव के बाद एनसीपी का समर्थन शिंदे गुट को मिलने से शिवसेना (शिंदे) की स्थिति मजबूत हुई है।
बीएमसी की स्टैंडिंग कमेटी व सुधार कमेटी में पहले हीं महायुति की बहुमत नहीं मिल रही है, जिससे कमेटी का अध्यक्ष कौन होगा, यह अब तक साफ नहीं हो पाया है। 26 सदस्यता वाली इन कमेटियों में बीजेपी व शिंदे गुट के मिलाकर 13 सदस्य ही हो रहे हैं और बहुमत के लिए 14 सदस्य की जरूरत पड़ेगी।
पक्ष और विपक्ष के 13-13 सदस्य होने के कारण सुचार कमेटी में अध्यक्ष किस पार्टी का होगा, इसका फैसला लाटरी के माध्यम से किया जाएगा, वहीं स्टैंडिंग कमेटी में शिक्षण कमेटी का अध्यक्ष निर्णायक वोट डालने का अधिकार रखता है। अगर राकां के नगरसेवक बीजेपी के साथ आ जाते हैं तब जाकर बहुमत का रास्ता साफ हो सकता है, अन्यथा कमेटी में पेंच फंस सकता है।
कोंकण भवन में बीजेपी और शिवसेना एक साथ पंजीकरण नहीं कर रहे हैं। एक साथ पंजीकरण करने की वजह से कई दिक्कते आ सकती है। शिवसेना स्वतंत्र गुट बनायेगी। भाजपा के साथ अगर संयुक्त गुट बनाते हैं तो कई मुद्दों पर नुकसान हो सकता है। शिवसेना को स्वतंत्र ऑफिस नहीं मिल सकता। भाजपा गुट नेता की बात हमेशा माननी पड़ेगी और स्थायी समिति सदस्य में नुकसान हो सकता है। भले स्वतंत्र गुट हो शिवसेना और भाजपा महायुति बनकर मुंबई मनपा का काम संभालेगी,
-अरुण सावंत (शिवसेना (शिंदे गुट) प्रवक्ता)
बीएमसी के मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा (89) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना (65) दूसरे स्थान पर है। शिंदे गुट की शिवसेना तीसरे नंबर पर है और कांग्रेस, मनसे, एमआईएम सहित अन्य दलों के भी सीमित संख्या में नगरसेवक है। ऐसे में एनसीपी के तीन नगरसेवकों का समर्थन सता संतुलन में अहम भूमिका निभा सकता है।
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राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि समर्थन के बदले एनसीपी नगरसेवकों को बीएमसी की विभिन्न समितियों में प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है। हालांकि, इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुल मिलाकर, बीएमसी महापौर चुनाव से पहले एनसीपी के इस फैसले ने मुंबई की नगर राजनीति को और रोचक बना दिया है।