Mumbai Election: बीएमसी चुनाव से पहले वोट बैंक की तस्वीर साफ, मुस्लिम वोटर भी अहम
Maharashtra News: बीएमसी चुनाव से पहले जारी फाइनल वोटर लिस्ट में मराठी और मुस्लिम मतदाता सबसे प्रभावी बनकर उभरे हैं। ठाकरे बंधुओं की एकजुटता से सियासी समीकरण बदल सकते हैं।
- Written By: अपूर्वा नायक
कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Local Body Election: आगामी बीएमसी चुनाव को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। ऐसे में सबसे पहले मतदाताओं की गणित को समझने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्य चुनाव आयोग ने फाइनल वोटर लिस्ट जारी कर दी है, जिसके मुताबिक, शहर में एक करोड़ 3 लाख से अधिक मतदाता हैं। सभी राजनीतिक पार्टियां कुल 227 बाड़ों में मतदाताओं की जानकारी निकालने में जुटी हुए हैं।
सबसे पहले हिंदू, मुस्लिम, ईसाई के आधार पर मतदाताओं की लिस्ट तैयार की जा रही है। इसके बाद मराठी भाषी व हिंदी भाषी के आधार पर वोटरों का आंकड़ा देखा जा रहा है। इसके अनुसार राजनीतिक दल वोटरों को लुभाने के लिए रणनीतियां बनाने का काम कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, 227 वार्डों में से 138 वार्डों में मराठी मतदाताओं का दबदबा है, जिससे उद्धव व राज ठाकरे को सीधा फायदा मिल सकता है।
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लगभग 28 सीटों पर गुजराती और उत्तर राजस्थानी और करीब 10 सीटों पर भारतीय वोटरों का दबदबा है। वर्ष 2017 में शिवसेना अविभाजित थी और बीजेपी व शिवसेना दोनों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। 2017 में शिवसेना ने 84 सीटें जीती थी, लेकिन अब शिवसेना के 46 नगरसेवकों ने शिंदे गुट का दामन थाम लिया है।
इसके अलावा कांग्रेस के 6, राकांपा के 5 एमआईएम और सपा के दो व मनसे के एक, ऐसे कुल 16 पूर्व नगरसेवकों ने भी शिंदे गुट से हाथ मिला लिया है। मौजूदा समय में 62 पूर्व नगरसेवक शिंदे गुट के साथ है। वहीं बीजेपी के पास 82 नगरसेवक थे।
इसमें से कांग्रेस के 4, उद्धय गुट के एक, अपक्ष 1, ऐसे कुल 6 नगरसेवक बीजेपी में शामिल हुए है। बीएमसी पर पिछले 4 दशकों से शिवसेना का कब्जा रहा है। अब उद्धव और राज एकजुट हो गए हैं। ऐसे में मराठी वोटर गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। यह जिस तरफ मुड़ जाएं, यहां का पलड़ा भारी हो सकता है। बीजेपी का कहना है कि 150 सीट जीतना उसका लक्ष्य है।
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मराठी के बाद मुस्लिम वोटरों का बड़ा प्रभाव
- लेकिन मराठी वोटरों के समर्थन के बिना यह संभव नहीं है। प्राप्त आकड़ों के अनुसार 227 वाहों में से 52 वार्ड ऐसे हैं, जहां 51 प्रतिशत से 84 प्रतिशत तथा 25 वार्ड ऐसे है, जहां 23 से 35 प्रतिशत मराठी वोटर है।
- 47 वार्डों में मुस्लिम वोटरों की संख्या अधिक है। इसके अलावा 28 वाडों में गुजराती राजस्थानी और सिर्फ 23 वाहों में उत्तर भारतीय वोटरों का प्रभाव है, जो जीत हार का गणित ठीक कर सकते है, इसके अलावा पंजाबी ईसाई व दक्षिण भारतीय वोटर भी सत्ता के समीकरण में प्रभावी साबित होंगे।
- वर्ष 2017 में 91 लाख से अधिक मतदाता थे, इसमें से 65 प्रतिशत मराठी चोटर थे, वहीं 23 प्रतिशत मुस्लिम वोटर थे, विशेषज्ञों का मानना है कि राज और उद्धव के एकजुट होने से बीजेपी और शिंदे गुट को समस्या हो सकती है। वहीं कई जगहों पर मुस्लिम मतदाता भी उद्धव गुट का सपोर्ट कर सकते हैं, जिससे आने वाले चुनाव में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।
