बीएमसी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Mumbai News In Hindi: बीएमसी चुनाव में नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब सभी उम्मीदवार अपने प्रचार अभियान में जुट गए हैं। राज्य चुनाव आयोग ने प्रत्येक उम्मीदवार के लिए खर्च की सीमा 15 लाख रुपये तय की है।
जानकारों का कहना है कि यह लिमिट सिर्फ कागजों पर होगी, लेकिन पर्दे के पीछे प्रत्येक उम्मीदवार करोड़ों रुपये खर्च करेंगे। बड़ा सवाल यह है कि बीएमसी प्रशासन इस पर किस तरह नकेल कसेगी। यह भी सवाल उठ रहे हैं कि 15 लाख रुपये की लिमिट बढ़नी चाहिए, क्योंकि असल में जो खर्चा है, उससे तुलना करने पर यह लिमिट काफी कम है।
हालांकि, पिछले चुनाव में (2017) यह लिमिट 10 लाख थी। अब आठ साल बीत चुके गए हैं और महंगाई दर बढ़ी है। उसके हिसाब से यह लिमिट नाकाफी मानी जा रही है। आयोग ने उम्मीदवारों से कहा है कि उन्हें अपने इस खर्च का ब्यौरा देना पड़ेगा और जो उम्मीदवार अपने लिमिट से ज्यादा खर्च चुनाव करेंगे उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि राज्य चुनाव आयोग ने मुंबई सहित ‘ए’ श्रेणी की पुणे और नागपुर महानगरपालिकाओं के उम्मीदवारों को 15 लाख रुपये तक खर्च करने की सीमा तय की है। पहले यह खर्च की सीमा 10 लाख रुपये थी।
‘बी’ वर्ग की महापालिकाओं (पिंपरी चिंचवाड, नासिक, ठाणे) में यह सीमा 13 लाख रुपए तय की गई है। ‘सी’ वर्ग की महापालिकाओं (कल्याण- डोंबिवली, नवी मुंबई, छत्रपति संभाजी नगर, वसई-विरार) के लिए चुनाव खर्च की सीमा 11 लाख की सीमा तय की है, जबकि ‘डी’ वर्ग की 19 अन्य महानगरपालिकाओं के लिए यह सीमा 9 लाख रुपये निश्चित किया है।
चुनाव खर्च पर प्रभावी नियंत्रण रखने के लिए मनपा ने कड़े कदम उठाए है। नामांकन पत्र दाखिल करने के दिन से ही सभी उम्मीदवारों के लिए दैनिक चुनाप खर्च का लेखा-जोखा रखना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके लिए प्रचलित स्थानीय दरों के अनुसार एक मानक दर सूची भी तय की गई है। सहायक आयुक्त (कर निर्धारण एवं संग्रह) गजानन बेल्लाले ने बताया कि उम्मीदवारों की प्रचार रैलियों और अन्य प्रचार गतिविधियों पर होने वाले खर्च की नियमित जांच की जाएगी।
चुनाव आयोग ने जो खर्च की सीमा निर्धारित की है वह मौजूदा महंगाई के हिसाब से बहुत ही कम है। उम्मीदवारों को काफी परेशानी होती है। इसलिए चुनाव आयोग को इस बारे में सकारात्मक रुख अपनाते हूर खर्च की सीमा बढ़ानी चाहिए।
– सचिन सावंत, मुख्य प्रववता-कांग्रेस
महंगाई के हिसाब से चुनाव आयोग ने सीमा निर्धारित की है, यह कम तो है लेकिन पाबंदी जरूरी भी है। नहीं तो सामान्य लोग इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन पाएंगे अमीर लोग पैसा फेंक कर सत्ता हथिया लेंगे।
– अरुण सावंत, प्रवक्ता, शिवसेना (एकनाथ शिंदे)
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इस संबंध में महानगरपालिका मुख्यालय में लेखा अधिकारियों और लेखागालों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रमुख लेखापाल (वित्त), वित्तीय सलाहकार तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में खर्च निरीक्षक, लेखा दल, फ्लाइंग स्ववॉड और वीडियो निगरानी दलों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। चुनाव प्रचार के दौरान होने वाले खर्च, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और अवैध सार्च पर तत्काल कार्रवाई क निर्देश दिए गए। 15 फरवरी 2024 के आदेश के अनुसार उम्मीदवारों को चुनाव खर्च एक अलग बैंक खाते से करना अनिवार्य है।