महाराष्ट्र निकाय चुनाव (सौ. AI)
BMC Election 2026: बीएमसी चुनाव पर मोदी सरकार की भी नजर है। इसकी वजह यह है कि यहां पर अपने दम पर अगर भाजपा को बढ़त मिल जाती है तो उसे वर्ष 2029 आम चुनाव तक किसी भी सहयोगी की जरूरत नहीं रहेगी।
वह अपने दम पर बिना किसी सहयोगी के दबाव के महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक अपनी सरकार चला पाएगी। इसकी वजह यह है कि अगर बीएमसी में भाजपा को बढ़त मिल जाती है तो एनसीपी अजीत पवार से लेकर शिवसेना शिंदे तक के सांसदों के स्वतंत्र रूप से भी भाजपा को समर्थन देने का विकल्प खुल सकता है।
जिससे एक ओर, भाजपा की महाराष्ट्र में सहयोगियों पर निर्भरता खत्म हो जाएगी। वहीं, केंद्र सरकार चलाने के लिए भी उसे बहुत अधिक जेडीयू और टीडीपी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे अजीत पवार से लेकर एकनाथ शिंदे सहित किसी भी सहयोगी की भाजपा को बहुत अधिक जरूरत नहीं रहेगी और भाजपा अपने दम पर आत्मनिर्भर हो जाएगी।
भाजपा के गणित को समझाते हुए एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि बीएमसी चुनाव के बाद कोई ऐसा बड़ा चुनाव नहीं है। जिसमे भाजपा को सहयोगी की वास्तव में बहुत अधिक जरूरत है। तमिलनाडू में उसका एआईएडीएमके के साथ गठबंचन हो गया है।
जबकि केरल, असम और पश्चिम बंगाल में भाजपा को चुनाव में जाने के लिए किसी सहयोगी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। इसी तरह से वर्ष 2027 में उम्र का चुनाव है। वहां पर भाजपा स्वयं आत्मनिर्भर है। राज्य में सहयोगी दलों को उसकी अधिक जरूरत है। जबकि ओडिशा में भाजपा पहले ही सरकार में आ गई है। मप्र में उसे सहयोगी ही जरूरत नहीं है।
भाजपा ने बिहार में भी अपना आधार बहुत बढ़ा लिया है। ऐसे में वर्ष 2029 से पहले भाजपा को वास्तव में किसी सहयोगी की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार की बात करें तो यहां पर उसे इस समय जेडीयू और टीडीपी की जरूरत है।
लेकिन बीएमसी में अगर भाजपा को अपने दम पर बढ़त मिल जाती है तो यह निर्भरता भी खत्म हो जाएगी, इसकी वजह यह है कि शिवसेना शिंदे और शिवसेना उद्धव दोनों का विकल्प उसके पास रहेगा। इसी तरह से एनसीपी में भी अजीत पवार से लेकर शरद पवार के नियंत्रण वाले गुटों का विकलप उसके पास रहेगा।
भाजपा का आकलन है कि अगर बीएमसी चुनाव में उसे बढ़त मिलती है तो यह उसके लिए नए बूस्टर के रूप में कार्य करेगा। इससे उसे महाराष्ट्र में सरकार चलाने के लिए एकनाथ शिंदे या अजीत पवार की पार्टी की जरूरत नहीं रहेगी।
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हालांकि भाजपा उनको ना अपने गठबंधन से अलग नहीं करेगी। लेकिन के इस समय जिस तरह से शिंदे के नाराज होने की सूचनाएं सामने आती हैं या फिर अजीत पवार को लेकर भ्रम की स्थिति रहती है। वह खत्म हो जाएगी। यह कहा जा रहा है कि बीएमसी चुनाव के नतीजों के बाद प्रफुल पटेल भाजपा की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
मुंबई से नवभारत लाइव के लिए संतोष ठाकुर की रिपोर्ट