BMC Elections 2026: ‘नोटा’ वोटों में बढ़ोतरी, उम्मीदवारों से असंतोष का साफ संकेत
BMC Elections 2026 में एक लाख से अधिक मतदाताओं ने ‘नोटा’ का विकल्प चुनकर राजनीतिक दलों को चेतावनी दी है। जागरूक मतदाताओं ने मतदान तो किया, लेकिन किसी भी उम्मीदवार को स्वीकार नहीं किया।
- Written By: अपूर्वा नायक
नोटा बटन (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai News In Hindi: बीएमसी चुनाव में इस बार मतदाताओं के रुझान ने राजनीतिक दलों को गंभीर संदेश दिया है। शहर भर में 1 लाख से अधिक मतदाताओं ने ‘नोटा’ (इनमें से कोई नहीं) विकल्प का चयन कर यह स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी उम्मीदवार से संतुष्ट नहीं हैं।
15 जनवरी को हुए मतदान में कुल 54 लाख 76 हजार 43 मत डाले गए, जिनमें से 1 लाख 327 वोट नोटा को मिले, जो कुल मतदान का लगभग 1.83 प्रतिशत है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बड़ी संख्या में जागरूक मतदाताओं ने मतदान तो किया, लेकिन उपलब्ध विकल्पों को अस्वीकार कर दिया।
पश्चिमी उपनगरों में सबसे अधिक नोटा
सबसे अधिक नोटा वोट पश्चिमी उपनगरों में दर्ज किए गए, दहिसर से बांद्रा तक के इलाकों में 47,936 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना, जो इस क्षेत्र के कुल मतदान का करीब 1.9 प्रतिशत है।
सम्बंधित ख़बरें
बॉलीवुड एक्ट्रेस कीर्ति कुल्हारी का क्रेडिट कार्ड हैक, मिनटों में खाते से उड़े ₹2.43 लाख; पुलिस में मामला दर्ज
अंधेरी वेस्ट मेट्रो स्टेशन पर बनेगा कैप्सूल होटल, यात्रियों को मिलेगी स्लीप पॉड्स में आराम की नींद
अमित शाह से डील पक्की, शरद पवार को वापस मिलेगी NCP? दमानिया के बड़े दावे से अजित गुट को छूटा पसीना
स्कूल कैंटीनों में अब चॉकलेट, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक नहीं मिलेंगे! तुकाराम मुंढे का आदेश- क्वालिटी बोर्ड अनिवार्य
इसके बाद पूर्वी उपनगरों-भांडुप से सायन क्षेत्र में 29,101 नोटा के पक्ष में वोट पड़े, जो लगभग 1.7 प्रतिशत रहा, वहीं दक्षिण मुंबई के कोलाबा, माहिम और माटुंगा क्षेत्र में 23,290 मतदाताओं ने नोटा को प्राथमिकता दी, खास बात यह रही कि वार्ड 226 में नोटा वोटों का प्रतिशत 5.1 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो शहर के अन्य वार्डों की तुलना में काफी अधिक है।
ये भी पढ़ें :- Board Exams से पहले महाराष्ट्र बोर्ड का यूट्यूब चैनल लॉन्च, नियमों पर मिलेगा वीडियो मार्गदर्शन
विशेषज्ञों का मानना है कि नोटा वोटों में बढ़ोतरी राजनीतिक दलों के लिए चेतावनी है। यह संकेत देता है कि मतदाता पारदर्शिता, विकास और स्थानीय मुद्दों पर ठोस कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 से नोटा विकल्प मतपत्र में शामिल किया गया था, ताकि कोई मतदाता वोट डालने से वंचित न रहे, अपनी असहमति लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज करा सके।
