अब AI देगा बिल्डिंग की NOC, 45 दिन नहीं 48 घंटे में होगा काम, BMC ने शुरू किया ट्रायल
Mumbai Building NOC: बीएमसी अब एआई की मदद से बिल्डिंग और फैक्ट्री निर्माण की एनओसी मंजूरी 45–120 दिनों से घटाकर 48-72 घंटे में देने की तैयारी कर रही है। इसका ट्रायल जारी है।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
AI-Based Building Permission In Mumai: मुंबई शहर में किसी इमारत या फैक्ट्री बनाने से पहले बीएमसी से इजाजत लेनी पड़ती है. इसके लिए संबंधित व्यक्ति को बीएमसी के पोर्टल ऑटो डीसीआर का सहारा लेना पड़ता है। इसके अलावा बीएमसी के कई सारे मानदंड या यूं कहे कि गाइडलाइन रहते है, जिसे व्यक्ति को ध्यान रखना पड़ता है, ताकि वह बताए गए मानदंड का पालन कर सके।
बीएमसी के मुताबिक, इमारत या फैक्ट्री बनाने के लिए अनापत्ति सर्टिफिकेट (NOC) लेने के लिए अमूमन 45 दिन का समय लगता है जो कभी कभी बढ़कर 60 से 120 दिनों तक हो जाता है. लेकिन अब बीएमसी प्लान कर रही है कि इसे आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस
48 से 72 घंटे में मिलेगा अप्रूवल
बीएमसी के नियोजन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि एनओसी देने के लिए एआई का इस्तेमाल किया जाएगा और फिलहाल इसका ट्रायल जारी है। एआई का इस्तेमाल कर संबंधित फाइल को उसमें अपलोड किया जाएगा।
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इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फाइल की मानदंड के अनुसार जांच करेगा। अगर सभी नियमों का पालन किया गया है तो 24 से 72 घंटे के भीतर एआई इजाजत दे देगा। इससे समय की बचत होगी और जल्दी काम का निपटारा होगा। वहीं ऑटो डीसीआर एप होने के बावजूद यही अप्रूवल लेने के लिए 45 से 120 दिन लगते है जिसमें फाइल कई सारे विभाग से होकर जाती है।
एआई की एंट्री में हल्का विलंब
अधिकारी ने बताया कि एआई का ट्रायल जारी है। जैसे ही ट्रायल सफल होगा उसके बाद इसका इस्तेमाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा, अभी हर तकनीकी पहलुओं को समझा जा रहा है। सब कुछ सही होने के बाद बीएमसी आयुक्त की इजाजत लेकर बिल्डिंग प्रपोजल व प्लानिग विभाग में इसकी एंट्री होगी, हालांकि इसके लिए थोड़ा समय लगेगा।
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पहली बार नहीं हो रहा एआई का इस्तेमाल
बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं होगा कि एआई का इस्तेमाल किया जाएगा, इसके पहले नाले में से गाद निकालने के संबंध में प्राप्त सभी वीडियो का बीएमसी प्रशासन एआई प्रणाली की सहायता ले रहा है। इस वर्ष पहली बार एआई का ऐसा प्रयोग किया गया है, जिससे नालों की सफाई के कार्य की उचित निगरानी, कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में प्रशासन को सहायता मिलेगी।
– नवभारत लाइव के लिए मुंबई से ब्रिजेश पाठक की रिपोर्ट
