मुंबई: रिटायर बैंक मैनेजर 54 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’; ATS और NIA के नाम पर ठगों ने लूटे 40.90 लाख रुपये
Bhandup Digital Arrest Fraud: भांडुप में रिटायर बैंक मैनेजर से 40.90 लाख की ठगी। ATS अधिकारी बनकर ठगों ने 54 दिनों तक रखा डिजिटल अरेस्ट में। मुंबई साइबर सेल मामले की जांच कर रही है।
- Written By: अनिल सिंह
भांडुप साइबर फ्रॉड: दिल्ली बम धमाकों और मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर ठगी (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-AI)
Bhandup Retired Bank Manager Scammed: मुंबई के भांडुप क्षेत्र में डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर राजेंद्र तुकाराम सुर्वे को जालसाजों ने करीब दो महीने तक मानसिक रूप से बंधक बनाकर रखा और उनसे लाखों रुपये ऐंठ लिए। यह पूरी साजिश 10 मार्च 2026 को शुरू हुई, जब सुर्वे के पास सिग्नल ऐप के जरिए एक कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली एटीएस (ATS) का अधिकारी बताया।
ठगों ने पीड़ित को विश्वास दिलाया कि उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर कर्नाटक में एक बैंक खाता खोला गया है। दावा किया गया कि इस खाते से करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है और इसका संबंध जनवरी में दिल्ली में हुए बम धमाकों से है। सुर्वे को डराने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेशों का भी सहारा लिया गया, जिससे वे पूरी तरह सहम गए।
54 दिनों तक कमरे में रहे कैद
जालसाजों ने ‘डिजिटल अरेस्ट‘ के नाम पर सुर्वे को उनके ही घर के एक कमरे में रहने का निर्देश दिया। उन्हें हिदायत दी गई कि वे इस जांच के बारे में अपनी पत्नी या किसी भी बाहरी व्यक्ति से चर्चा न करें, अन्यथा उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डर के मारे पीड़ित ने ठगों के हर निर्देश का पालन किया और किसी को अपनी स्थिति की भनक तक नहीं लगने दी।
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शेयर और लोन के जरिए वसूली
ठगों ने सुर्वे को अपनी संपत्ति सुरक्षित करने का झांसा देकर पहले 2.90 लाख रुपये वसूले। इसके बाद उन्हें शेयर बाजार में निवेश किए गए 29 लाख रुपये के शेयर बेचने के लिए मजबूर किया गया, जिसमें से 28 लाख रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए गए। जब ठगों का मन इतने से भी नहीं भरा, तो उन्होंने ‘बेल सिक्योरिटी’ के नाम पर 10 लाख रुपये और मांगे, जिसे पीड़ित की पत्नी ने बैंक से लोन लेकर चुकाया।
ठगी का अहसास और पुलिस कार्रवाई
ठगों ने वादा किया था कि जांच पूरी होने के दो दिनों के भीतर सारी रकम वापस कर दी जाएगी, लेकिन पैसे मिलते ही उन्होंने सभी संपर्क काट दिए। काफी समय बीतने के बाद जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तब सुर्वे को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने 3 मई को साइबर हेल्पलाइन पर सूचना दी और 4 मई 2026 को औपचारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल, मुंबई साइबर सेल उन बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें यह बड़ी रकम ट्रांसफर की गई थी।
