ED को लगा बड़ा झटका, अपीलीय न्यायाधिकरण ने बिल्डर अविनाश भोसले की संपत्तियां रिलीज करने का दिया आदेश
Avinash Bhosle Case: पुणे के बिल्डर अविनाश भोसले की संपत्तियों को रिलीज करने का आदेश दिया गया है। अपीलीय न्यायाधिकरण ने ED के आरोपों को निराधार बताते हुए जब्ती कार्रवाई को अमान्य घोषित किया।
- Written By: गोरक्ष पोफली
अविनाश भोसले (सोर्स: सोशल मीडिया)
Avinash Bhosle Case Property Release: प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत गठित अपीलीय न्यायाधिकरण ने पुणे के प्रमुख व्यवसायी और ABIL ग्रुप के संस्थापक अविनाश भोसले को एक बड़ी कानूनी राहत प्रदान की है। न्यायाधिकरण ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जब्त की गई उनकी संपत्तियों को तुरंत रिलीज करने का आदेश दिया है। अध्यक्ष न्यायमूर्ति मुनीश्वर नाथ भंडारी और सदस्य जी.सी. मिश्रा की पीठ ने ED की जब्ती कार्रवाई को अमान्य घोषित करते हुए इसे रद्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
अविनाश भोसले पर आरोप था कि उन्होंने दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) की समूह कंपनी आरकेडब्ल्यू डेवलपर्स को बांद्रा में एक परियोजना के लिए 750 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत कराने में भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, भोसले की कंपनियों पर वर्ली में एक स्लम पुनर्विकास परियोजना के लिए परामर्श शुल्क (Consultancy Fee) प्राप्त करने और धोखाधड़ी से 71.82 करोड़ रुपये का भुगतान लेने का आरोप लगाया गया था।
न्यायाधिकरण की महत्वपूर्ण टिप्पणी
अपीलीय न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में ED के उन आरोपों को पूरी तरह निराधार पाया जिनमें कहा गया था कि DHFL ने अविनाश भोसले की कंपनियों को अवैध तरीके से भुगतान किया था। ट्रिब्यूनल ने गौर किया कि भोसले की कंपनियों और अन्य पक्षों के बीच ऋण समझौता वर्ष 2014 में हुआ था। ED ने स्वयं स्वीकार किया कि उस समय भविष्य में होने वाले किसी भी संभावित अपराध की जानकारी का कोई सबूत नहीं था। परियोजना लागत, वास्तुकला डिजाइन और वित्तीय मूल्यांकन पर दी गई सलाह के बदले प्राप्त शुल्क को अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) नहीं माना जा सकता।
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25 करोड़ की जब्ती रहेगी बरकरार
हालांकि न्यायाधिकरण ने भोसले को बड़ी राहत दी है, लेकिन 25 करोड़ रुपये की संपत्तियों की जब्ती को फिलहाल बरकरार रखा गया है। इसके अलावा अन्य सभी संपत्तियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को अमान्य माना गया है।
इस फैसले को केंद्रीय जांच एजेंसी ED के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। ट्रिब्यूनल के इस आदेश के बाद अब अविनाश भोसले की अधिकांश संपत्तियां उनके नियंत्रण में वापस आ जाएंगी, जो पिछले लंबे समय से कानूनी दांव-पेच में फंसी हुई थीं।
