रायगढ़ के तटों पर टार बॉल्स का संकट, जहरीले हुए समंदर के किनारे, समुद्री जीवों पर मंडराया मौत का साया
Tar Balls Raigad: रायगढ़ के समुद्र तटों पर भारी मात्रा में टार बॉल्स जमा हो गए हैं। तेल रिसाव के कारण बढ़ते इस प्रदूषण से समुद्री जीवसृष्टि और पर्यटकों की सेहत पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
- Written By: गोरक्ष पोफली
तट पर टार बॉल्स (सोर्स: सोशल मीडिया)
Raigad Beach Pollution: मानसून की दस्तक से पहले रायगढ़ जिले की खूबसूरत किनारे पर एक बेहद चिंताजनक स्थिति पैदा हो गई है। जिले के विभिन्न समुद्र तटों पर भारी मात्रा में ‘टार बॉल्स’ बहकर आ गए हैं। समुद्र में तेल रिसाव और जहाजों के कचरे से पैदा हुए इस प्रदूषण ने न केवल समुद्री जीव-जंतुओं, बल्कि इंसानी स्वास्थ्य और पर्यटन के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।
क्या है ‘टार बॉल्स’ का खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्र में कच्चे तेल के रिसाव (Oil Spill) या जहाजों द्वारा छोड़े गए ईंधन और कचरे के कारण ये टार बॉल्स बनते हैं। समुद्र की लहरों के साथ मिलकर तेल सख्त हो जाता है और छोटे-छोटे काले गोलों का रूप ले लेता है, जो ज्वार-भाटे के साथ किनारे पर जमा हो जाते हैं। रायगड के बीच पर अब इन काले धब्बों और दुर्गंध के कारण प्राकृतिक सौंदर्य पूरी तरह नष्ट हो गया है, जिससे पर्यटकों ने भी यहाँ से किनारा कर लिया है।
सागरी जीवसृष्टी और स्वास्थ्य पर बुरा असर
इस प्रदूषण का सबसे सीधा और घातक प्रहार सागरी जीवसृष्टि पर हो रहा है। मछलियों, केकड़ों और अन्य समुद्री जीवों के शरीर में यह विषैला पदार्थ पहुंचने से उनके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। स्थानीय मछुआरों का मानना है कि इससे मछलियों के प्रजनन और उनकी गुणवत्ता पर असर पड़ेगा, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। वहीं, बीच पर घूमने वाले लोगों की त्वचा पर यह चिपचिपा डांबर लग सकता है, जिससे त्वचा संबंधी रोगों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ गया है।
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प्रशासन की चुप्पी से रोष
तटवर्ती इलाकों के निवासियों और प्रकृति प्रेमियों में रायगढ़ प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले यह समस्या विकराल रूप ले लेती है, लेकिन प्रशासन प्रदूषकों पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं करता। लोगों ने मांग की है कि प्रदूषण के मूल स्रोतों का पता लगाया जाए और समुद्र तटों की सफाई के लिए तत्काल विशेष अभियान चलाया जाए।
