अजित पवार व अमोल मिटकरी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Amol Mitkari Valentine Letter To Ajit Pawar: राजनीति में रिश्तों की अहमियत कभी-कभी विचारधाराओं से ऊपर निकल जाती है। वैलेंटाइन डे, जिसे प्यार के इजहार का दिन माना जाता है, इस मौके पर एनसीपी विधायक अमोल मिटकरी ने अपने मार्गदर्शक और दिवंगत नेता अजित पवार (अजित दादा) को याद करते हुए एक भावुक पत्र साझा किया है। इस पत्र में मिटकरी का दर्द और अपने नेता के प्रति अटूट निष्ठा साफ झलक रही है।
अमोल मिटकरी ने अपने पत्र की शुरुआत अजित दादा के प्रति अपने प्रेम और सम्मान से की है। उन्होंने लिखा कि लव यू दादा, मैं आपको बता नहीं सकता कि आपके जाने के बाद मेरे लिए भविष्य में क्या छिपा है। मिटकरी ने अजित पवार को न केवल एक राजनीतिक नेता, बल्कि एक पारिवारिक अभिभावक और जीवन का आधार स्तंभ बताया। उन्होंने पत्र में इस बात का जिक्र किया कि दादा के साथ बिताई गई यादें आज भी उनके साथ हैं, लेकिन उनकी कमी को कोई पूरा नहीं कर सकता।
अमोल मिटकरी ने लिखा “आज वैलेंटाइन डे है! अपने प्रिय व्यक्ति के लिए अपनी फीलिंग्स बताने का यह दुनिया भर में प्यार का दिन है। जब तुम मेरे सामने थे, तो शायद मुझमें इस प्यार को ज़ाहिर करने की हिम्मत नहीं होती, लेकिन आज, आपकी गैरमौजूदगी में मैं इसे इस लेटर जैसी वर्ड पजल के जरिए जाहिर कर रहा हूं।”
अमोल मिटकरी ने आगे लिखा “दादा, मुझे विश्वास था कि मैं आषाढ़ी एकादशी, श्रीक्षेत्र पंढरपुर पर मैं पत्नी के साथ विट्ठल महापूजा करूंगा और हर एकादशी पर मुझे इसका एहसास होता था। जिस पल से मैंने समझना शुरू किया, विट्ठल मेरे दिल के बहुत करीब लगने लगे। मेरे पिता के लोहबान से बने ये विट्ठल, 33 करोड़ देवताओं को छोड़कर हमारे घर में हमारा सब कुछ बन गए थे। मैंने अपने घर में विट्ठल-रुक्मिणी की मूर्ति स्थापित करने का सपना देखा था, जो आपकी कृपा से, आपके और सुनेत्रा भाभी के हाथों से बना था। हालांकि किसी कारण से आप नहीं आ सके, आपकी अनुमति से, मैंने वारकरी बुजुर्गों की मदद से मंदिर में सहपत्नी मूर्ति स्थापित की। 7 अप्रैल 2025 से 28 जनवरी 2026 तक, मैंने अपने घर में रोजाना पूजा, भजन और विट्ठल का नाम लिया। मेरे घर में पंढरी देवता की पूजा हो रही थी और मेरा जीवन पुण्यमय और फलदायी होता जा रहा था।”
लेकिन, 28 जनवरी की दशमी और 29 जनवरी की एकादशी ने मेरे परिवार पर ऐसा हमला किया कि मानो हमारे विट्ठल हमें छोड़कर चले गए हों। पहले इस विट्ठल ने मेरे पिता को छीन लिया था, लेकिन अब मेरी राजनीति के ‘पिता’ को भी छीन लिया है। पहले की तरह, मेरा परिवार एक बार फिर तबाह हो गया।
दादा, मुझे यकीन नहीं हो रहा कि आप अब हमारे बीच नहीं हैं। यह मेरा पागलपन हो सकता है, लेकिन मेरा मन इस सच्चाई को मानने को तैयार नहीं है। 2019 में आपने मेरी बात सुनी, मुझे पार्टी में ले गए, मुझे बड़ी ज़िम्मेदारी दी, हवाई यात्रा का इंतजाम किया और मुझे MLA बनाया। आपने न सिर्फ मुझे घर दिया, बल्कि समाज में इज्जत और राजनीतिक इज्जत भी दिलाई। आपने विदेश यात्राएं अरेंज कीं, मुझे मेरे पिता की मौत का दुख भुलाकर काम पर लगाया, मुझे अनुशासन सिखाया और काम में मज़ा लेने का मंत्र दिया। आपने मुझे सब कुछ दिया।
अमोल मिटकरी ने अंत में लिखा कि आज कहने लायक हज़ारों यादें हैं, लेकिन व्यक्त होने के लिए शब्द कम पड़ रहे हैं। जनता ने आपको जो वह पुकार दी थी, वही आज मैं फिर से दे रहा हूं… ‘लव यू दादा!’ आज आपकी बहुत याद आ रही है। भविष्य ने मेरी झोली में क्या रख छोड़ा है, यह पता नहीं। हर किसी को लगता है कि जीवन का अंत मधुर हो, लेकिन आपके नसीब में तो निंदा-आलोचना ही आई। आज एकादशी है… आपकी वजह से ही मैं विठ्ठल के प्रेम में पड़ा था, लेकिन उसी ने इसी दिन आपको मुझसे छीन लिया। वह विठ्ठल अब मन से उतर चुका है… उससे मेरा झगड़ा जीवनभर चलता रहेगा!
यह भी पढ़ें:- Thane Coastal Road: अब मिनटों में तय होगा ठाणे से भायंदर का सफर! MMRDA ने पूरा किया फाउंडेशन का 50% काम
अजित पवार के निधन के बाद से ही अमोल मिटकरी लगातार विमान हादसे की जांच की मांग कर रहे हैं। इस पत्र में भी उनके शब्दों में एक गहरा दुख और आक्रोश नजर आया। उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इस मामले की जांच किसी बाहरी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की थी। मिटकरी का मानना है कि अजित दादा की मौत महज एक हादसा नहीं, बल्कि इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।
अमोल मिटकरी का यह पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का कद बहुत बड़ा था और उनके अचानक चले जाने से उनके समर्थक अब भी सदमे में हैं। मिटकरी के इस पत्र ने न केवल प्रशंसकों को भावुक कर दिया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर उस हादसे की चर्चा छेड़ दी है।