Mumbai News: मराठी मानुष को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे, अमित ठाकरे का भावुक वचन
Amit Thackeray: मनपा चुनाव में मनसे को झटके के बाद अमित ठाकरे का बड़ा संदेश। बोले- मराठी और मराठी मानुष को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे, सत्ता से ज्यादा जनता का भरोसा अहम।
अमित ठाकरे (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Mumbai News In Hindi: मुंबई समेत महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव नतीजे शुक्रवार को घोषित हुए, जिनमें महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को बड़ा झटका लगा है।
ठाकरे बंधुओं के साथ आने के बावजूद मनसे इस चुनाव में केवल 13 उम्मीदवारों को ही जीत दिला सकी। मुंबई महानगरपालिका में पार्टी के सिर्फ 6 नगरसेवक निर्वाचित हुए।
चुनाव नतीजों से मनसे में निराशा
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपेक्षित सफलता न मिलने पर नाराजगी और दुख जाहिर किया। इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता अमित ठाकरे ने भी एक लंबी भावनात्मक पोस्ट साझा कर कार्यकर्ताओं और समर्थकों से संवाद किया।
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अमित ठाकरे का भावुक संदेश
अमित ठाकरे ने अपनी पोस्ट में साफ शब्दों में कहा कि मराठी और मराठी मानुष के लिए मनसे की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने लिखा कि नतीजे चाहे जैसे भी हों, उन्हें इस बात की पीड़ा है कि मराठी मानुष की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए शायद उन्हें अभी और मेहनत करनी होगी।
वोट से आगे का रिश्ता
अमित ठाकरे ने कहा कि उनका और मराठी मानुष का रिश्ता कभी केवल एक वोट या चुनावी बटन तक सीमित नहीं रहा। राजनीति में जीत-हार चलती रहती है, लेकिन उनके लिए लोगों के दिल जीतना हमेशा ज्यादा अहम रहा है।
सत्ता हो या न हो, संघर्ष जारी रहेगा
उन्होंने वचन दिया कि मराठी मानुष को कभी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। अमित ठाकरे ने कहा कि जनता से मिला प्यार और समर्थन किसी भी सत्ता से बड़ा है। सत्ता में रहें या न रहें, महाराष्ट्र सैनिक और शिवसैनिक मराठी मानुष के हक के लिए हमेशा आगे रहेंगे। महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता के लिए यह लड़ाई आगे भी पूरी मजबूती से जारी रहेगी।
राज ठाकरे का भी स्पष्ट संदेश
उधर, राज ठाकरे ने भी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मनसे को इस बार अपेक्षित सफलता नहीं मिली, इसका उन्हें दुख है, लेकिन पार्टी हिम्मत हारने वालों में से नहीं है। जो नगरसेवक चुने गए हैं, वे अपने-अपने क्षेत्रों में सत्ताधारियों के लिए मजबूत चुनौती बनेंगे।
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दीर्घकालीन लड़ाई का संकेत
राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि मनसे की लड़ाई मराठी मानुष, मराठी भाषा, मराठी अस्मिता और समृद्ध महाराष्ट्र के लिए है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष दीर्घकालीन है और चुनाव के बाद क्या चूका, क्या कम पड़ा और आगे क्या करना है, इसका विश्लेषण कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
