कर्जमाफी का वादा है झूठा! सिर्फ 2% किसानों को मिलेगा लाभ, अमित देशमुख ने खोल दी सरकार की शर्तों की पोल
Amit Deshmukh Statement Farmer Loan Waiver Maharashtra: अमित देशमुख का सरकार पर बड़ा हमला; बोले- कर्जमाफी का वादा झूठा, शर्तों के कारण सिर्फ 2% किसानों को ही मिलेगा लाभ।
- Written By: अनिल सिंह
देवेंद्र फडणवीस और अमित देशमुख (फोटो क्रेडिट-X)
Amit Deshmukh On Farmer Loan Waiver: महाराष्ट्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों के वोट बैंक को साधने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर कृषि ऋण माफी की घोषणा की थी। सरकार का दावा था कि इस कदम से राज्य के लाखों कर्जदार किसानों को नई जिंदगी मिलेगी और वे दोबारा सम्मान से खेती कर सकेंगे। लेकिन कांग्रेस के कद्दावर नेता अमित देशमुख ने इस योजना के भीतर छुपी हुई कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों को जनता के सामने लाकर सरकार के दावों की हवा निकाल दी है। देशमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार की नीयत कभी भी पूरी कर्जमाफी देने की नहीं थी, बल्कि वे केवल हेडलाइंस बटोरने के लिए लोकलुभावन घोषणाएं कर रहे हैं।
पूर्व मंत्री ने लातूर में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए इस योजना के क्रियान्वयन और उसके पीछे के असल गणित को मीडिया के सामने रखा।
नियमों और शर्तों का ऐसा जाल, जिसमें हर किसान हो रहा अनुत्तीर्ण
अमित देशमुख ने वित्तीय आंकड़ों और विभागीय दिशा-निर्देशों का विश्लेषण करते हुए बताया कि सरकार ने कर्जमाफी के लिए जो पात्रता मानदंड तय किए हैं, वे इतने कठोर हैं कि सामान्य किसान उन्हें कभी पूरा ही नहीं कर सकता। उन्होंने कहा, “जब आप किसी योजना में दस तरह की शर्तें जोड़ देते हैं, जैसे नियमित कर्ज भुगतान का इतिहास, भूमि की सीमा, परिवार में किसी के पास अन्य आय का स्रोत होना या बैंक खातों की तकनीकी कड़ियां, तो वास्तविक पीड़ित किसान अपने आप रेस से बाहर हो जाता है। यही कारण है कि हमारी गणना के अनुसार 100 में से केवल 2 किसान ही इसके पात्र बन पा रहे हैं।”
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‘किसानों की आंखों में धूल झोंक रही है महायुति सरकार’
देशमुख ने सरकार की कर्जमाफी योजना की मंशा पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य का किसान पहले से ही बेमौसम बारिश, सूखे और फसलों के गिरते दामों के कारण आत्महत्या की कगार पर खड़ा है। ऐसे संवेदनशील समय में उनके घावों पर मरहम लगाने के बजाय सरकार केवल चुनावी फायदे के लिए खोखले वादे कर रही है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार वाकई ईमानदार है, तो उसे बिना किसी नियम, शर्त और बिना किसी सीमा (कैपिंग) के राज्य के प्रत्येक कर्जदार किसान का पूरा सात-बारा (भूमि रिकॉर्ड) पूरी तरह से कोरा यानी कर्जमुक्त करना चाहिए।
आगामी विधानसभा चुनाव में गूंजेगा कर्जमाफी की विफलता का मुद्दा
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमित देशमुख द्वारा उठाया गया यह मुद्दा सीधे तौर पर ग्रामीण मतदाताओं को प्रभावित करने वाला है। महाविकास अघाड़ी (MVA) अब इस ‘2 प्रतिशत लाभ’ वाले आंकड़े को लेकर पूरे राज्य में तहसील और जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने की तैयारी कर रही है। पश्चिमी महाराष्ट्र, विदर्भ और मराठवाड़ा के किसान बहुल क्षेत्रों में इस मुद्दे को भुनाकर विपक्ष सरकार को बैकफुट पर धकेलने की रणनीति बना रहा है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अमित देशमुख के इन तीखे और तार्किक आरोपों पर सत्ताधारी दल के कृषि मंत्री और मुख्यमंत्री क्या सफाई पेश करते हैं।
