मुंबई भाजपा में ‘फंड पक्षपात’ पर घमासान! अमित साटम ने लिखी चिट्ठी, ‘सभी पार्षदों को मिले समान पैसा’
Ameet Satam BMC Fund Allocation: अमित साटम ने अंधेरी पश्चिम के पार्षदों को मिले अतिरिक्त फंड को रद्द करने की मांग की। बीएमसी में फंड संतुलन के लिए लिखा पत्र।
- Written By: अनिल सिंह
Amit Satam BMC Fund Allocation
BMC Fund Allocation: मुंबई नगर निगम (BMC) में फंड के वितरण को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा मुंबई अध्यक्ष और विधायक अमित साटम के निर्वाचन क्षेत्र (अंधेरी पश्चिम) में नगरसेवकों को आवंटित की गई अतिरिक्त धनराशि अब पार्टी के भीतर ही विवाद का कारण बन गई है। चर्चा थी कि साटम के निर्वाचन क्षेत्र में चयनात्मक तरीके से बड़ी राशि वितरित की जा रही थी, जिससे भाजपा के अन्य नगरसेवकों में असंतोष फैल रहा था। इस विवाद पर विराम लगाने और ‘पारदर्शिता’ का संदेश देने के लिए स्वयं अमित साटम ने मोर्चा संभाला है।
अमित साटम ने बीएमसी की स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे को एक औपचारिक पत्र लिखकर मांग की है कि अंधेरी पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के कुछ पार्षदों को दी गई अतिरिक्त धनराशि को तुरंत रद्द किया जाए। साटम ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन का वितरण संतुलित, निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए। उन्होंने मीडिया में आई खबरों पर सफाई देते हुए बताया कि यह मामला 16 अप्रैल को ही उनके संज्ञान में आ गया था और उन्होंने तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए थे।
क्या है ‘फंड विवाद’ का पूरा गणित?
विवाद की जड़ अंधेरी पश्चिम के कुछ खास वार्डों को आवंटित की गई भारी-भरकम राशि है। रिपोर्ट के अनुसार, वार्ड नंबर 65 से 71 के बीच भाजपा के नगरसेवकों को 6 करोड़ से लेकर 9 करोड़ रुपये तक का फंड आवंटित किया गया था।
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- वार्ड 68 (रोहन राठौड़): 9 करोड़ रुपये
- वार्ड 65, 67, 69, 70, 71: प्रत्येक को 6 करोड़ रुपये
जब यह जानकारी सामने आई कि भाजपा के अन्य निर्वाचन क्षेत्रों के नगरसेवकों को इतनी राशि नहीं मिल रही है, तो पार्टी के भीतर ही ‘पक्षपात’ के आरोप लगने लगे। भाजपा के अंदरूनी हलकों में चल रही इस नाराजगी को देखते हुए साटम ने संतुलन बनाने की वकालत की है।
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भाजपा के भीतर बढ़ता असंतोष
शिवसेना को बीएमसी की सत्ता से बेदखल करने के बाद भाजपा पार्षदों को उम्मीद थी कि अब विकास कार्यों के लिए धन का प्रवाह समान रूप से होगा। हालांकि, फंड आवंटन में ‘सतम फैक्टर’ की चर्चा ने पार्टी के भीतर दरार पैदा कर दी। कई पार्षदों का मानना था कि एकतरफा नियंत्रण के बावजूद कुछ खास चेहरों को ही प्राथमिकता दी जा रही है। साटम ने अपने पत्र में इसी ‘असमानता’ को दूर करने का अनुरोध किया है ताकि पार्टी की छवि को नुकसान न पहुँचे।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
अपने बयान में अमित साटम ने कहा, “हम सार्वजनिक निधियों के वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” उन्होंने स्थायी समिति से अनुरोध किया है कि अंधेरी पश्चिम के बजाय इस अतिरिक्त फंड को पूरी मुंबई के सभी पार्षदों के बीच न्यायसंगत तरीके से वितरित किया जाए। अब देखना यह होगा कि स्थायी समिति साटम के इस पत्र पर क्या एक्शन लेती है और क्या इससे भाजपा के भीतर जारी ‘फंड पॉलिटिक्स’ शांत होती है।
