अक्षय तृतीया पर महाराष्ट्र सरकार की बड़ी सफलता, प्रशासन ने रोके 13 बाल विवाह
Meghna Bordikar: अक्षय तृतीया के अवसर पर महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग ने सतर्क निगरानी, जनजागरूकता अभियान व सख्त प्रशासनिक कार्रवाई के माध्यम से 13 बाल विवाह समय रहते रोककर बड़ी सफलता मिली।
- Written By: आंचल लोखंडे
Child Marriage Prevention (सोर्सः सोशल मीडिया)
Child Marriage Prevention: अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर जहाँ पूरा महाराष्ट्र उत्सव के माहौल में डूबा था, वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक बड़ी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल की है। राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर ने जानकारी दी कि विभाग की सतर्कता और प्रभावी योजना के कारण राज्य भर में होने वाले 13 बाल विवाहों को सफलतापूर्वक समय रहते रोक दिया गया।
अक्षय तृतीया को साढ़े तीन मुहूर्तों में से एक अत्यंत शुभ मुहूर्त माना जाता है, जिसके कारण इस दिन सामूहिक विवाहों की आड़ में बाल विवाह होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इस खतरे को भांपते हुए राज्यमंत्री बोर्डीकर की अध्यक्षता में पहले ही एक उच्च स्तरीय ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में विभाग के सचिव, आयुक्त, सभी जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए थे कि वे अपनी पूरी मशीनरी को मुस्तैद रखें और किसी भी संदिग्ध विवाह पर कड़ी नजर रखें।
जनजागृति अभियान का व्यापक असर
प्रशासन ने केवल कार्रवाई ही नहीं की, बल्कि जमीनी स्तर पर जनमत बनाने के लिए व्यापक अभियान भी चलाया। जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन (1098), आंगनवाड़ी सेविकाओं और ग्राम बाल संरक्षण समितियों के माध्यम से गांव-गांव तक संदेश पहुंचाया गया। कीर्तन, पथनाट्य, पदयात्रा और पोस्टर्स के जरिए नागरिकों को बाल विवाह के शारीरिक और मानसिक दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही, कई स्थानों पर लोगों को बाल विवाह रोकने की शपथ भी दिलाई गई।
सम्बंधित ख़बरें
राज्य में बाल संरक्षण व्यवस्था की होगी जिला-वार समीक्षा, 15 जुलाई तक रिपोर्ट अनिवार्य,आयोग ने जारी किए निर्देश
नागपुर HC का सख्त रुख: 3 साल बाद भी जवाब न देने पर नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव को 50 हजार जुर्माने का नोटिस
नागपुर हाई कोर्ट की सरकार को कड़ी फटकार: अधिकारियों की नाकामी का खामियाजा कोई बुजुर्ग पेंशनभोगी क्यों भुगते?
नासिक के मालेगांव में बारिश के बीच मकान बना मौत का जाल, छत ढहने से दादी-पोते की हुई दर्दनाक मौत
कठोर कानूनी प्रावधान और कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि लड़की की आयु 18 वर्ष और लड़के की आयु 21 वर्ष से कम पाई जाती है तो केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि मंगल कार्यालय के मालिक, बैंड-बाजा बजाने वाले, पुजारी और रिश्तेदारों पर भी 24 घंटे के भीतर मामला दर्ज करने का प्रावधान है।
ये भी पढ़े: नॉट रिचेबल AIMIM पार्षद सहर शेख आई सामने, फर्जी दस्तावेज के आरोपों पर दिखा करारा जवाब, देखें VIDEO
इसी सख्ती का परिणाम है कि अहिल्यानगर में 5, धाराशिव में 2, यवतमाल में 2 और रायगढ़, बुलढाणा, छत्रपती संभाजीनगर व परभणी में 1-1 बाल विवाह रोका गया। यवतमाल में तो एक मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई है। राज्यमंत्री मेघना बोर्डीकर ने कहा कि इस समन्वित कार्रवाई ने समाज में एक कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भविष्य में भी इस कुप्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए विभाग इसी तरह की प्रभावी मुहिम जारी रखेगा।
