50 वर्षों से बसे घरों पर संकट , नागरिकों ने दी अकोला मनपा पर दस्तक
अकोला के डॉ. आंबेडकर नगर में 50 वर्षों से बसे परिवारों के घरों पर संकट, नागरिकों ने मनपा से मान्यता और सहायता की मांग की।
Akola Districts: पिछले 60 वर्षों से अकोला के डॉ. आंबेडकर नगर और इरानी झोपड़पट्टी क्षेत्र में रह रहे सैकड़ों परिवारों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है. नगर निगम के विकास कार्यों के लिए यह भूमि आरक्षित किए जाने से नागरिकों के घरों पर बुलडोज़र चलने की आशंका बनी हुई है.
इसी पृष्ठभूमि में बहुजन समाज संगठन, महाराष्ट्र प्रदेश की ओर से मंगलवार को अकोला मनपा आयुक्त को निवेदन देकर इन घरों को नियमानुसार मान्यता देने और घरकुल योजना का लाभ देने की मांग की गई. निवेदन में कहा गया है कि डॉ. आंबेडकर नगर और इरानी झोपड़पट्टी क्षेत्र के नागरिक पिछले 50 से 60 वर्षों से यहाँ रह रहे हैं. कई घरों के पास विद्युत मीटर, मनपा जल कनेक्शन और टैक्स रसीदें भी हैं.
दो पीढ़ियों से रहकर सरकार को टैक्स भरने के बावजूद इन घरों को नियमानुकूल क्यों नहीं किया गया, यह सवाल नागरिकों ने उठाया है. बहुजन समाज संगठन के अध्यक्ष गौतम कंकाल ने आरोप लगाया कि 18 जुलाई 2014 की मनपा सर्वसाधारण सभा के एक प्रस्ताव के कारण यह संकट उत्पन्न हुआ है. इस प्रस्ताव के अनुसार जनता बाजार, पुराना बस स्टैंड और इरानी झोपड़पट्टी क्षेत्र को वाणिज्य संकुल और सिटी बस स्टैंड के लिए आरक्षित किया गया है.
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विकास के नाम पर गरीबों को मत उजाड़ोवहीं डॉ. आंबेडकर नगर और उर्दू स्कूल की भूमि नगर निगम के केंद्रीय कार्यालय के लिए रखी गई है. संगठन ने सवाल उठाया कि विकास के नाम पर गरीबों के घर उजाड़ना कितना उचित है. राजस्व व वन विभाग के 27 अक्टूबर 2025 के शासन निर्णयानुसार यह भूमि मनपा को हस्तांतरित करने के संकेत मिले हैं. इससे गरीब परिवारों में भय का वातावरण है. अब इस संवेदनशील मामले में अकोला महानगरपालिका प्रशासन क्या भूमिका लेता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं.
