अजित पवार: महाराष्ट्र के ‘अनटचेबल’ राजनीतिक स्टालवर्ट, 11 बार बजट किया पेश
Ajit Pawar Budget Record: महाराष्ट्र के दिग्गज नेता अजित पवार का राजनीतिक सफर अनुशासन, छह बार उपमुख्यमंत्री बनने और 11 बार बजट पेश करने के रिकॉर्ड के लिए जाना जाता है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Ajit Pawar deputy CM (सोर्सः सोशल मीडिया)
Ajit Pawar Political Journey: महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार छह बार डीसीएम बने और सबसे अधिक बार बजट पेश करने वाले नेताओं में शामिल रहे, लेकिन मुख्यमंत्री बनने का उनका सपना अधूरा ही रह गया। महाराष्ट्र की राजनीति में ‘दादा’ के नाम से पहचाने जाने वाले अजित अनंतराव पवार का 28 जनवरी 2026 की सुबह बारामती में एक विमान हादसे में निधन हो गया।
66 वर्षीय अजित पवार उस समय महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री थे। वे जिला पंचायत चुनाव के प्रचार के लिए बारामती जा रहे थे, तभी लैंडिंग के दौरान उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में उनके साथ चार अन्य लोगों की भी दर्दनाक मौत हो गई। इस त्रासदी के साथ ही सूबे का मुख्यमंत्री बनने का उनका सपना भी हमेशा के लिए अधूरा रह गया।
अनुशासन और कड़क प्रशासन की पहचान
महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार अपनी तेज-तर्रार कार्यशैली और वित्तीय अनुशासन के लिए जाने जाते थे। सुबह 6 बजे बैठकों की शुरुआत, फाइलों का गहन अध्ययन और अधिकारियों से सीधे सवाल पूछना उनकी कार्यशैली का हिस्सा था। यदि कोई अधिकारी गलत जानकारी देता, तो वे उसे सार्वजनिक रूप से टोकने से भी नहीं हिचकते थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बार मजाकिया लहजे में कहा था“हम शिफ्ट में काम करेंगे, सुबह की ड्यूटी अजित पवार की और रात की मेरी।”
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कोविड काल में आर्थिक संतुलन
कोविड संकट के दौरान जब कई राज्यों की अर्थव्यवस्था डगमगा रही थी, तब महाराष्ट्र के वित्तीय अनुशासन की देशभर में सराहना हुई। जनमत की नब्ज पहचानते हुए अजित पवार ने अपने बजटों में जनोन्मुखी फैसले लिए।
किसानों, महिलाओं और युवाओं पर फोकस
अजित पवार के बजट आमतौर पर किसानों, मजदूरों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, विद्यार्थियों और युवाओं को केंद्र में रखकर बनाए जाते थे। वर्ष 2021 का बजट उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) को महिलाओं को समर्पित किया था। 2024 के चुनाव-पूर्व बजट में ‘लाडकी बहिन योजना’ जैसी योजनाओं ने महायुति की जीत में अहम भूमिका निभाई।
ऐसा रहा सियासी सफर
अपने चाचा शरद पवार के नक्शेकदम पर चलते हुए अजित पवार ने 1982 में राजनीति में प्रवेश किया। वे पहले एक चीनी कारखाने के बोर्ड में चुने गए। 1991 में बारामती से लोकसभा सांसद बने, लेकिन बाद में यह सीट अपने चाचा के लिए खाली कर दी। इसके बाद वे 1991 से लगातार आठ बार बारामती से विधायक चुने गए (1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और नवंबर 2024)। 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने सगे भतीजे युगेंद्र पवार को एक लाख से अधिक मतों से हराया।
2010 में पहली बार बने डिप्टी सीएम
अजित पवार महाराष्ट्र के इतिहास में सबसे अधिक बार (6 बार) उपमुख्यमंत्री बनने वाले नेता रहे। उन्होंने जल संसाधन, योजना, कृषि और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले। 2010 में वे पहली बार उपमुख्यमंत्री बने और तभी से उनकी छवि एक सख्त, कर्मठ और परिणामोन्मुख प्रशासक की बनी।
उपमुख्यमंत्री के कार्यकाल
| क्रमांक | कार्यकाल | मुख्यमंत्री |
|---|---|---|
| 1 | 10 नवंबर 2010 – 25 सितंबर 2012 | पृथ्वीराज चव्हाण |
| 2 | 25 अक्टूबर 2012 – 26 सितंबर 2014 | पृथ्वीराज चव्हाण |
| 3 | 23 नवंबर 2019 – 26 नवंबर 2019 | देवेंद्र फडणवीस |
| 4 | 30 दिसंबर 2019 – 29 जून 2022 | उद्धव ठाकरे |
| 5 | 2 जुलाई 2023 – दिसंबर 2024 | एकनाथ शिंदे |
| 6 | दिसंबर 2024 – 28 जनवरी 2026 | देवेंद्र फडणवीस |
वित्त मंत्री के रूप में अजित पवार ने 11 बार महाराष्ट्र का बजट पेश किया। इस सूची में वे शेषराव वानखेडे (13 बार) के बाद दूसरे स्थान पर रहे।
स्थान वित्त मंत्री बजट
- शेषराव वानखेडे: 13
- अजित पवार: 11
- जयंत पाटिल: 10
- सुशील कुमार शिंदे: 9
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विवाद और सियासी उतार-चढ़ाव
2013 में सिंचाई घोटाले के आरोपों के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा, हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई। 2019 में उन्होंने राकां में बगावत कर भाजपा के साथ सरकार बनाई, जो मात्र 80 घंटे चली। 2023 में राकां का विभाजन कर वे महायुति सरकार में शामिल हुए और 2024 में 41 सीटें जीतकर दमदार वापसी की।
अधूरी रह गई मुख्यमंत्री बनने की ख्वाहिश
अजित पवार की सबसे बड़ी राजनीतिक महत्वाकांक्षा महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना थी। उन्होंने और उनकी मां आशा पवार ने सार्वजनिक रूप से यह इच्छा जताई थी। लेकिन विमान हादसे ने उस सपने को हमेशा के लिए अधूरा छोड़ दिया।
