
Divyang empowerment (सोर्सः सोशल मीडिया)
Divyang Empowerment: दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब केवल एक आधुनिक तकनीकी अवधारणा नहीं रह गई है, बल्कि उनके दैनिक जीवन की चुनौतियों को दूर करने का एक प्रभावी साधन बनती जा रही है। मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि एआई और सहायक प्रौद्योगिकी के माध्यम से दिव्यांग व्यक्तियों को सुलभ सेवाएं उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाना चाहिए।
‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ की पृष्ठभूमि में “दिव्यांग व्यक्तियों के समावेशन एवं सशक्तिकरण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता उजागर करना” विषय पर मुंबई के होटल इंटरकॉन्टिनेंटल में प्री-समिट राउंड टेबल बैठक का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव तुकाराम मुंढे भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई।
मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि एआई की सहायता से विकसित इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर, कृत्रिम हाथ-पैर, संवाद सहायक उपकरण, आई-ट्रैकिंग सिस्टम और हेड-माउस जैसे नवाचार दिव्यांग व्यक्तियों को स्वावलंबी जीवन जीने में मदद कर रहे हैं। बौद्धिक अक्षमता के क्षेत्र में, विशेषकर ऑटिज्म के निदान और उपचार प्रक्रिया में भी एआई की भूमिका महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
बहुभाषी चैटबॉट और डिजिटल सहायता प्रणालियों के माध्यम से दिव्यांग नागरिकों को आवश्यक जानकारी, थेरेपी केंद्रों, विशेष विद्यालयों और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ एक क्लिक पर उपलब्ध कराया जा रहा है। गूगल, मेटा और एआई क्षेत्र से जुड़े लगभग 101 स्टार्टअप्स वर्तमान में दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
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दिव्यांग कल्याण विभाग के सचिव तुकाराम मुंढे ने बताया कि शासन की वेबसाइट्स और डिजिटल पोर्टल्स को दिव्यांग-अनुकूल बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। निकट भविष्य में एक सर्वसमावेशी और सुलभ डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाएगा, जहां एक बार पंजीकरण करने के बाद दिव्यांग व्यक्तियों को सभी पात्र योजनाओं, सुविधाओं और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध होगी।






