नवी मुंबई चुनाव में हाईकोर्ट के फैसले से ट्विस्ट, BJP उम्मीदवार को राहत, दोबारा छपेंगे बैलेट पेपर

Navi Mumbai Election: हाईकोर्ट ने नवी मुंबई मनपा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार नीलेश भोजने का नामांकन रद्द करने का आदेश अवैध ठहराया। कोर्ट ने मतपत्र दोबारा छापने और चुनाव तय समय पर कराने के निर्देश दिए।
Navi Mumbai Municipal Election Bombay High Court
नवी मुंबई मनपा व बॉम्बे हाई कोर्ट (सोर्स: सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Navi Mumbai Municipal Election: आगामी 15 जनवरी को होने वाले नवी मुंबई नगर निकाय चुनाव से पहले भाजपा प्रत्याशी नीलेश भोजने को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी जीत मिली है। अदालत ने वार्ड 17(ए) के लिए उनके नामांकन को अवैध रूप से खारिज करने वाले आदेश को निरस्त कर उनका नाम स्वीकृत उम्मीदवारों की सूची में जोड़ने का निर्देश दिया है।

चुनाव अधिकारी के फैसले पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी

नवी मुंबई के वार्ड 17(ए) (वाशी) में चुनावी सरगर्मियों के बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव अधिकारी के एक आदेश को 'अवैध और मनमाना' करार दिया है। दरअसल, चुनाव अधिकारी ने 31 दिसंबर, 2025 को एक आदेश जारी कर भाजपा उम्मीदवार नीलेश भोजने का नामांकन पत्र रद्द कर दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए भोजाने ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने न केवल उस आदेश को निरस्त किया, बल्कि चुनावी प्रक्रिया पर लगी अंतरिम रोक को भी हटा दिया और आदेश दिया कि चुनाव निर्धारित समय पर आयोजित किए जाएं।

क्यों हुआ था नामांकन रद्द?

नामांकन रद्द करने के पीछे चुनाव अधिकारी ने महाराष्ट्र नगर निगम अधिनियम की धारा 10(1डी) को आधार बनाया था। इस धारा के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति या उसके परिवार के किसी सदस्य ने अनधिकृत या अवैध निर्माण किया है, तो उसे पार्षद पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। चुनाव अधिकारी का आरोप था कि भोजाने की संपत्ति पर अवैध निर्माण है। हालांकि, नीलेश भोजने ने अपनी याचिका में दलील दी कि कानून की यह धारा केवल वर्तमान पार्षदों पर लागू होती है, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों पर नहीं। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए पाया कि चुनाव अधिकारी ने अपनी शक्तियों का प्रयोग मनमाने ढंग से किया था।

मतपत्रों का पुनर्मुद्रण और चुनावी तैयारी

कोर्ट के इस फैसले के बाद, प्रशासन को अब मतपत्रों को फिर से मुद्रित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था करनी होगी ताकि उम्मीदवारों की संशोधित सूची में नीलेश भोजने का नाम शामिल किया जा सके। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चुनाव में अब कोई और बाधा नहीं आनी चाहिए और भोजाने का नाम स्वीकृत उम्मीदवारों में शामिल होना अनिवार्य है। इस आदेश ने न केवल भोजाने की उम्मीदवारी को बहाल किया है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में कानूनी स्पष्टता को भी रेखांकित किया है।

इस कानूनी जीत को एक क्रिकेट मैच में गलत तरीके से 'आउट' दिए गए बल्लेबाज के 'डिसीजन रिव्यू सिस्टम' (DRS) की तरह देखा जा सकता है, जहाँ तीसरे अंपायर (अदालत) ने मैदानी अंपायर की तकनीकी गलती को सुधारते हुए खिलाड़ी को फिर से पिच पर वापस बुला लिया है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com