

Uddhav Thackeray Speech Shivaji Park Rally: आज मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क और दादर की सड़कों पर एक ऐसा जनसैलाब उमड़ा, जिसने महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है। मौका था अभिनंदन मोर्चा का, जहां वर्षों बाद ठाकरे परिवार के दिग्गज राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक साथ, एक ही मंच पर नजर आए। यह रैली केवल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि NEET परीक्षा घोटाले के खिलाफ लड़ रहे छात्रों और अभिभावकों के संघर्ष की जीत का उत्सव बन गई।
मंच पर जब मनसे प्रमुख राज ठाकरे आए, तो उन्होंने साफ कर दिया कि आज वह लंबी चौड़ी राजनीतिक बातें नहीं करेंगे। उन्होंने घोषणा की, आज भाषण का दिन नहीं, केवल खुशी मनाने का दिन है। राज ठाकरे ने उन छात्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने नीट पेपर लीक के विवाद और मानसिक दबाव के कारण आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने इस जीत का पूरा श्रेय Gen Z यानी आज की युवा पीढ़ी को देते हुए कहा कि इनके संघर्ष ने सरकार के अहंकार को मिट्टी में मिला दिया है।
शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए इसे भाजपा विरुद्ध भारत की लड़ाई करार दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को अब शासन और देश के भविष्य पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि उनके नेता केवल नेता फोड़ने के काम में लगे हुए हैं। उद्धव ठाकरे ने छात्रों की इस पहल की तुलना इतिहास के बड़े आंदोलनों से करते हुए कहा कि जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह संघर्ष इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
रैली में केवल उद्धव और राज ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के नेता आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे भी पूरी सक्रियता के साथ मौजूद थे। अमित ठाकरे ने बेहद विनम्रता दिखाते हुए मंच से झुककर छात्रों का आभार प्रकट किया और कहा कि जेन-जी ने ही हमें लड़ना सिखाया है। वहीं, आदित्य ठाकरे ने भी युवाओं की सामूहिक शक्ति का कौतुक किया और इसे अन्याय के खिलाफ एक बड़ी जीत बताया।
इस विशाल जनसैलाब को देखते हुए मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क और वीर सावरकर मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। सुबह 10 बजे से ही प्रमुख सड़कों पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी और ड्रोन कैमरों से भीड़ पर नजर रखी जा रही थी। इस अभिनंदन रैली में न केवल ठाकरे परिवार, बल्कि रोहित पवार, संजय राउत जैसे कई दिग्गज नेता भी शामिल हुए, जिससे इस आंदोलन को और अधिक मजबूती मिली।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपनी पहली जीत मानकर छात्रों और अभिभावकों के चेहरों पर जो उत्साह था, उसने साफ कर दिया कि यह लड़ाई अब और लंबी चलने वाली है। फिलहाल, मुंबई की सड़कों पर जुटी यह भीड़ सत्ता के लिए एक स्पष्ट चेतावनी बनकर उभरी है।