ग्राम विकास मंत्री की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट सख्त: 1 साल से लंबित अपील पर 3 सप्ताह में फैसला लेने का आदेश!

Gram Panchayat Appeal: नागपुर हाई कोर्ट ने ग्राम पंचायत मामले में एक वर्ष से लंबित वैधानिक अपील पर तीन सप्ताह के भीतर फैसला लेने का निर्देश ग्रामीण विकास मंत्री को दिया है।
High Court stern on Rural Development Minister's functioning: Orders decision within 3 weeks on an appeal pending for a year!
नागपुर हाई कोर्ट, ग्राम पंचायत मामला, (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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Minister Appeal Delay: नागपुर याचिकाकर्ता कंचन मेश्राम ने महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम की धारा 39 (1) के तहत 2 व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत पर विभागीय आयुक्त द्वारा एक विस्तृत जांच की गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय आयुक्त ने 21 अप्रैल 2025 को दोनों को उनके संबंधित पदों से हटा दिया था।

इस बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ प्रतिवादी ने अधिनियम की धारा 39(3) के तहत ग्राम विकास मंत्री के समक्ष एक वैधानिक अपील दायर की। मंत्री ने 9 जून 2025 को विभागीय आयुक्त के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसके परिणामस्वरूप जांच में दोषी पाए गए और पद से हटाए गए दोनों अधिकारी पिछले एक साल से अधिक समय से अपने पदों पर निर्बाध रूप से बने हुए हैं किंतु मामले पर अंतिम आदेश जारी नहीं किया गया जिससे याचिकाकर्ता की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई।

याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक वर्ष से अधिक समय से लंबित वैधानिक अपील पर अगले 3 सप्ताह के भीतर फैसला लेने के आदेश दिए।

एक माह की वैधानिक सीमा

अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि 9 जून 2025 से मंत्री द्वारा इस मामले में कोई सुनवाई नहीं की गई। अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 39(3) के प्रावधानों के अनुसार, ऐसे मामलों की गंभीरता को देखते हुए अपील का निपटारा एक महीने की वैधानिक सीमा के भीतर होना चाहिए लेकिन एक वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद न तो अपील तय की गई और न ही अंतरिम रोक हटाई गई।

हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि आमतौर पर उनके सामने ऐसे मामले आते हैं जहां मंत्री न तो अपील पर मेरिट के आधार पर फैसला लेते हैं। और न ही स्टे अर्जी पर, जिसके कारण निर्वाचित प्रतिनिधियों की सीटें खाली घोषित हो जाती हैं। और नए चुनाव होने से अपील ही निष्प्रभावी हो जाती है। अदालत ने कहा कि इस मौजूदा मामले में मंत्री का इसके बिल्कुल विपरीत रवैया देखने को मिला है, जहां स्टे देकर मामले को बिना सुनवाई के लटका दिया गया है।

मुख्यमंत्री को आदेश से कराएं अवगत

याचिका का निपटारा करते हुए हाई कोर्ट ने ग्रामीण विकास मंत्री को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से 3 सप्ताह के भीतर वे इस अपील पर अपना अंतिम निर्णय लें। इसके साथ ही लिए गए निर्णय की जानकारी अगले दो सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को दी जानी चाहिए।

मामले की प्रशासनिक गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को यह भी निर्देश दिया कि इस आदेश की एक प्रति राज्य के मुख्य सचिव को अग्रेषित की जाए। मुख्य सचिव को यह आदेश मुख्यमंत्री तथा विधि एवं न्याय मंत्री के समक्ष उनकी जानकारी और आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रस्तुत करना होगा।

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