मुंबई में नाला सफाई पर घमासान, भाजपा नेता ने ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने की उठाई मांग
Mumbai Drain Cleaning को लेकर बीएमसी सदन में तीखी बहस हुई। भाजपा नेता गणेश खणकर ने ठेकेदारों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए थर्ड पार्टी ऑडिट और ब्लैकलिस्टिंग की मांग की।
- Written By: अपूर्वा नायक
मीठी नदी फाइल फोटो (सौ. सोशल मीडिया )
Mumbai Drain Cleaning News: मुंबई में मानसून-पूर्व नाला सफाई व मीठी नदी के कामों में ठेकेदारों की तरफ से भारी लापरवाही बरती जा रही है। बारिश सिर पर होने के बावजूद वास्तव में मुंबई के छोटे-बड़े नाले अभी भी कचरे और कीचड़ से भरे पड़े हैं।
प्रशासन की इस लापरवाही के कारण इस साल मुंबईकरों को एक बार फिर जलभराव और भारी आर्थिक व मानसिक नुकसान का सामना करना पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। यह बात सदन के नेता और भाजपा नगरसेवक गणेश खणकर ने बीएमसी सदन में मेयर रितु तावड़े और पालिका प्रशासन के सामने अपनी बात रखते हुए कही।
सदन में अन्य सदस्यों ने भी खणकर के इस बयान का जोरदार समर्थन किया। खणकर ने कहा कि मीठी नदी की सफाई के लिए बीएमसी के करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। फिर भी मीठी नदी साफ नहीं होती? इस साल मीठी नदी का ठेका किसे दिया गया है? मुंबईकरों को और कितनी बार धोखा दिया जाएगा? इस बार पानी भरने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
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गड़बड़ी करने वालों को ब्लैकलिस्ट (काली सूची) में डालें, उनका वेतन रोकें। यहां ठेकेदारों का एक रैकेट चल रहा है। कौन मलबा हटाएगा और कौन पोकलेन मशीन देगा, यह तय करने वाला एक ही व्यक्ति है। इसका पता लगाया जाना चाहिए।
मनपा का 81 हजार करोड़ रुपये का बजट है, इसके बावजूद ठेकेदार हम सभी को बंधक बना लेते हैं। जब हम अंधेरी सबवे के निरीक्षण के लिए गए, तो एक ठेकेदार का सुपरवाइजर गुटखा खाकर हमारे सामने आकर बात कर रहा था। अब बहुत हो चुका, यह मुंबई कोई ठेकेदार नहीं चलाएगा, इसे हमारे जैसे चुने हुए नगरसेवक चलाएंगे। ऐसी चेतावनी भी सदन के नेता, नगरसेवक गणेश खणकर ने प्रशासन को दी।
ठेकेदारों को किया जाए ब्लैक लिस्ट, 400 से अधिक जगहों पर भरता है पानी
खणकर ने कहा कि प्रशासन हर साल दावा करता है कि ‘100% नाला सफाई पूरी हो चुकी है’। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर के प्रमुख बड़े नालों और उपनगरों की मीठी नदी, पोइसर, ओशिवारा और दहिसर जैसी नदियों के पात्र में अभी भी भारी मात्रा में कीचड़ (गाद) जमा दिख रहा है।
हर साल हिंदमाता, सायन, मिलन सबवे, अंधेरी सबवे, चेंबूर और कुर्ला जैसी 400 से अधिक जगहों पर पानी भर जाता है। इस साल इन ‘पलडिंग पॉइंट्स’ (जलभराव वाले स्थानों) से पानी निकालने के लिए लगाए गए हाई कैपेसिटी पंप अभी भी पूरी क्षमता से चालू नहीं किए गए हैं।
रेलवे ट्रैक के नीचे के कल्वर्ट्स और हाउसिंग सोसायटियों के बगल से गुजरने वाले छोटे नालों की सफाई पूरी नहीं हुई है। रेलवे और नगर पालिका के बीच तालमेल न होने के कारण रेलवे ट्रैक पानी में डूबने और लोकल सेवा ठप होने की पूरी आशंका है। सदन के माध्यम से मेरी प्रशासन से विनती है कि प्रत्येक वार्ड में नाला सफाई के काम का किसी तीसरी संस्था (थर्ड पार्टी) से तत्काल ‘ऑन-स्पॉट’ ऑडिट कराया जाए।
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मनपा के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर का जवाब
बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर ने स्पष्ट रूप से कहा है कि प्रशासन नाला सफाई के काम का थर्ड पार्टी ऑडिट कराने के प्रति सकारात्मक है। इस काम में अधिक पारदर्शिता और प्रभावशीलता लाने, तथा कुछ विशिष्ट ठेकेदारों के सिंडिकेट (साठगांठ) को तोड़ने पर हमारा विशेष जोर है।
उन्होंने यह भी साफ किया कि मीठी नदी की सफाई के काम के लिए नियुक्त किए गए ठेकेदारों पर पुरानी लॉबी दबाव बना रही है। नालों में बार-बार डाला जाने वाला कचरा और तैरता हुआ कचरा नाला सफाई के काम में मुख्य बाधा है। इस वजह से बार-बार नाला सफाई करने के बाद भी कचरा दिखाई देता है। हमने इसका भी समाधान ढूंढ निकाला है।
