गोवंडी में 72 घंटे की तोड़फोड़ नोटिस से तनाव, पुनर्वसन की मांग तेज; बीएमसी पर नियमों के उल्लंघन के आरोप
Mumbai News: गोवंडी में नाला चौड़ीकरण के नाम पर बीएमसी ने सैकड़ों घरों को 72 घंटे में हटाने का नोटिस दिया है। बिना व्यक्तिगत नोटिस और पुनर्वास के इस कार्रवाई का स्थानीय नागरिक पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
- Written By: रूपम सिंह
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Govandi Citizens Welfare Forum: मुंबई बीएमसी के एम-पूर्व विभाग की तरफ से गोवंडी के रफी नगर और दरगाह सेवा संघ परिसर में सैकड़ों घरों पर 72 घंटे के भीतर तोड़फोड़ कार्रवाई की नोटिस जारी किए जाने से इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। नाला चौड़ीकरण और बाढ़ नियंत्रण के नाम पर की जा रही इस कार्रवाई को कानून का उल्लंघन बताते हुए ‘गोवंडी सिटिजन्स वेलफेयर फोरम’ ने प्रशासन के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। मनपा द्वारा जारी यह नोटिस केवल सार्वजनिक स्वरूप की है, जिसमें किसी भी व्यक्तिगत निवासी का नाम या घर का नंबर उल्लेखित नहीं है।
नियमों के अनुसार किसी का घर तोड़ने से पहले अनुसार संबंधित व्यक्ति को व्यक्तिगत नोटिस देना, उसकी सुनवाई करना और पात्रता की जांच करना अनिवार्य होता है। लेकिन इस मामले में ऐसी किसी भी प्रक्रिया का पालन किए बिना सीधे निष्कासन की चेतावनी दिए जाने से रहिवासियों में भारी नाराजगी है।
इतना ही नहीं, रहिवासियों की ओर से यह दावा भी किया गया है कि नोटिस पर सक्षम अधिकारी के विधिवत हस्ताक्षर और आधिकारिक मुहर भी नहीं है। इस गंभीर मुद्दे पर ‘गोवंडी सिटिजन्स वेलफेयर फोरम’ के अध्यक्ष एडवोकेट फैयाज आलम शेख ने मनपा आयुक्त और उपनगर जिलाधिकारी को कानूनी नोटिस भेजा है।
सम्बंधित ख़बरें
मध्य रेल का इगतपुरी-कसारा सेक्शन पर 12-16 मई विशेष ब्लॉक, आसनगांव तक ही चलेंगी कसारा लोकल, देखें शेड्यूल
Chhatrapati Sambhajinagar: फार्मेसी कॉलेजों को PCI का अल्टीमेटम, 7 दिन में लागू करें बायोमीट्रिक सिस्टम
NEET पेपर लीक से नासिक का क्या है कनेक्शन, CBI जांच में मास्टरमाइंड का खुलासा; जानें कैसे सामने आया था पेपर
Central Railway के विस्टाडोम कोच बने यात्रियों की पहली पसंद, 5.33 लाख यात्रियों ने किया शाही सफर
गरीबों को बेघर करना गलत
शेख ने कहा, ‘हम नाला चौड़ीकरण या विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर गरीबों को बेघर करना गलत है। प्रशासन पहले नया सर्वेक्षण करे, रहिवासियों के दस्तावेजों की जांच करें और पात्र परिवारों के पुनर्वसन की व्यवस्था सुनिश्चित करे।
संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत प्रत्येक नागरिक को सम्मान पूर्वक जीवन और आश्रय का अधिकार प्राप्त है, उसका उल्लंघन नहीं होना चाहिए। यहां की अधिकांश आबादी मजदूर और मेहनतकश वर्ग की है।
यह भी पढ़ें:- मध्य रेल का इगतपुरी-कसारा सेक्शन पर 12-16 मई विशेष ब्लॉक, आसनगांव तक ही चलेंगी कसारा लोकल, देखें शेड्यूल
जब गरीब लोग यहां आकर बसते है तब उन्हें बीएमसी को रोकना चाहिए। जब कोई व्यक्ति आकर आशियाना बसाता है फिर एक दिन मुंबई बीएमसी उठती है और घर तोड़ने के लिए कहती है। विकास के साथ- साथ गरीब व मजदूर वर्ग का भी ख्याल रखा जाना चाहिए। पुनर्वसन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
– जमीर कुरैशी (बीएमसी स्टैंडिंग कमिटी सदस्य, एमआईएम)
