MOIL CMD नियुक्ति विवाद: 370 करोड़ के घोटाले के आरोपी विश्वनाथ सुरेश की कुर्सी खतरे में, हाई कोर्ट में सुनवाई
MOIL CMD Controversy: मॉयल के नए सीएमडी विश्वनाथ सुरेश की नियुक्ति पर हाई कोर्ट में याचिका दायर। SAIL में 370 करोड़ के कथित घोटाले और सीबीआई जांच के बीच पदभार संभालने पर उठे गंभीर सवाल।
- Written By: आकाश मसने
नागपुर में MOIL भवन (सोर्स: सोशल मीडिया)
MOIL CMD Vishwanath Suresh Controversy: देश की सबसे बड़ी मैंगनीज उत्पादक और ‘मिनी रत्न’ कंपनी मॉयल लिमिटेड के नवनियुक्त चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) विश्वनाथ सुरेश की नियुक्ति बड़े विवादों में घिर गई है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान लगभग 370 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में शामिल होने और लोकपाल व सीबीआई की जांच का सामना करने के बावजूद उन्हें मॉयल के शीर्ष पद पर नियुक्त किए जाने को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में ‘मॉयल जनशक्ति मजदूर संघ, बालाघाट’ की ओर से याचिका दायर की गई। इस पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से समय मांगे जाने पर हाई कोर्ट ने 7 मई तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद वाघमारे ने पैरवी की।
पद के दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप
याचिका के अनुसार विश्वनाथ सुरेश जब सेल में चीफ जनरल मैनेजर (सेल्स) और क्षेत्रीय प्रबंधक (उत्तरी क्षेत्र) के पद पर कार्यरत थे तब उन पर पद का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगा था। आरोप है कि उन्होंने सरकारी परियोजनाओं के नाम पर मेसर्स एवन स्टील इंडस्ट्रीज और मेसर्स वेंकटेश इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स जैसी निजी कंपनियों को बेहद सस्ते दामों पर उच्च गुणवत्ता वाला स्टील बेचा। इन कंपनियों ने बाद में इस स्टील को खुले बाजार में भारी मुनाफे के साथ बेचा जिससे सरकारी खजाने और SAIL को 263 करोड़ रुपये से लेकर 370 करोड़ रुपये तक का भारी नुकसान हुआ।
व्हिसलब्लोअर की शिकायत और CBI जांच
याचिका में बताया गया कि इस महाघोटाले का खुलासा एक व्हिसलब्लोअर द्वारा किया गया था जिसके बाद भारत के लोकपाल ने इस मामले का संज्ञान लिया। लोकपाल की पूर्ण पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 जनवरी 2024 और 2 जुलाई 2025 को दिए गए अपने आदेशों में सीबीआई को विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया था। लोकपाल के आदेश के बाद सुरेश सहित कई अन्य अधिकारियों को 19 जनवरी 2024 को निलंबित भी किया गया था। हालांकि बाद में जून 2024 में उनका निलंबन रद्द कर दिया गया लेकिन जांच अभी भी जारी है।
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नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
मॉयल जनशक्ति मजदूर संघ ने अपनी याचिका में सबसे बड़ा सवाल पब्लिक एंटरप्राइजेज सिलेक्शन बोर्ड और कैबिनेट की नियुक्ति समिति की कार्यप्रणाली पर उठाया है। याचिका में कहा गया है कि जब एक उच्च स्तरीय जांच (CBI और लोकपाल द्वारा) खुलेआम चल रही थी और सतर्कता विभाग की रिपोर्ट में भी सुरेश की संलिप्तता का साफ जिक्र था तो इन सभी तथ्यों को कैसे छुपाया या नजरअंदाज किया गया?
याचिका में इस बात पर भी हैरानी जताई गई है कि SAIL की पूर्व सीएमडी सोमा मंडल, जिनके कार्यकाल में यह कथित घोटाला हुआ और जो खुद जांच के घेरे में थीं, रिटायरमेंट के बाद पब्लिक एंटरप्राइजेज सिलेक्शन बोर्ड की सदस्य बन गईं। आरोप है कि उनके बोर्ड में रहते हुए ही सुरेश के नाम को मॉयल के सीएमडी पद के लिए मंजूरी दी गई जो एक ‘बड़े भ्रष्टाचार के नेटवर्क’ की ओर इशारा करता है।
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हाई कोर्ट से याचिका में किया अनुरोध
हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि है कि विश्वनाथ सुरेश की मॉयल के सीएमडी पद पर 6 जनवरी 2026 और 7 जनवरी 2026 को की गई नियुक्ति को पूरी तरह से अवैध और मनमाना घोषित करते हुए रद्द किया जाए। जब तक अंतिम फैसला नहीं आ जाता तब तक उनके सीएमडी के रूप में कार्य करने पर तुरंत रोक लगाई जाए। यूनियन का तर्क है कि एक दागी अधिकारी को सार्वजनिक उपक्रम का शीर्ष पद सौंपना सीपीएसयू के स्थापित नियमों, सार्वजनिक नीति और भ्रष्टाचार निरोधक दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है।
