लंबित मांगों को लेकर महाराष्ट्र में 85 हजार कृषि केंद्रों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, यवतमाल जिले में व्यापक असर
Yavatmal News: 'माफदा' के आह्वान पर यवतमाल सहित महाराष्ट्र के 85 हजार कृषि केंद्र संचालकों ने अनिश्चितकालीन बंद शुरू किया है। लिंकिंग सिस्टम और 'साथी' पोर्टल जैसी नीतियों का विरोध हो रहा है।
- Written By: रूपम सिंह
कृषि केंद्रों की अनिश्चितकालीन हड़ताल (सोर्स- नवभारत)
Yavatmal Agriculture Service Center: यवतमाल कृषि इनपुट विक्रेताओं की विभिन्न लंबित समस्याओं के समाधान को लेकर राज्यभर में आंदोलन तेज हो गया है। ‘माफदा’ संगठन द्वारा कृषि मंत्री, प्रधान सचिव और आयुक्त को ज्ञापन सौंपने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर सोमवार, 27 अप्रैल से राज्य के करीब 85 हजार कृषि सेवा केंद्र संचालकों ने अनिश्चितकालीन बंद का ऐलान कर दिया है। यवतमाल जिला कृषि सामग्री उत्पादक एवं विक्रेता संघ ने भी इस आंदोलन में सक्रियता से सहभाग लिया है।
पिछले 4-5 वर्षों से बीज, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के व्यवसाय से जुड़ी समस्याओं को लेकर शासन स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन समाधान न निकलने से विक्रेताओं ने आंदोलन का रास्ता अपनाया। प्रमुख मांगों में उर्वरक आपूर्ति में ‘लिंकिंग’ प्रणाली समाप्त करना, अप्रमाणित एचपीबीटी कपास बीजों पर प्रतिबंध, सैंपल फेल होने पर विक्रेताओं को आरोपी न बनाकर गवाह का दर्जा देना, ‘साथी’ पोर्टल की अनिवार्यता खत्म करना, बिक्री मार्जिन बढ़ाना, लंबित सैंपल राशि का भुगतान, एक्सपायरी कीटनाशकों की वापसी तथा अवैध कृषि इनपुट पर रोक शामिल हैं।
किसी कंपनी की आपूर्ति नहीं लेंगे झरी जामणी झरी जामणी तहसील कृषि सामग्री विक्रेता संघ ने इस संबंध में तात्कालिक सूचना जारी करते हुए कंपनी प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बंद के दौरान किसी भी परिस्थिति में माल की आपूर्ति न की जाए। साथ ही, परिवहन के माध्यम से आने वाले माल को भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। संघ की ओर से यह कड़ा रुख अपनाते हुए बंद का सख्ती से पालन करने की चेतावनी दी गई है।
सम्बंधित ख़बरें
MOIL CMD नियुक्ति विवाद: 370 करोड़ के घोटाले के आरोपी विश्वनाथ सुरेश की कुर्सी खतरे में, हाई कोर्ट में सुनवाई
गोंदिया में 2.05 लाख हेक्टेयर पर खरीफ बुआई की तैयारी, खाद-बीज महंगे, नकली बिक्री पर सख्ती
जनगणना कार्य के लिए एंड्रॉइड 12 की अनिवार्यता से शिक्षकों पर बढ़ा आर्थिक बोझ, निजी मोबाइल के उपयोग से असंतोष
‘तरबूज से तौबा’, 4 लोगों की मौत का कारण बने इस फल की वजह से मुंबई में दहशत, विसरा रिपोर्ट का हो रहा इंतजार
नेर तहसील में भी दिखा बंद का असर
महाराष्ट्र फर्टिलाइजेशन डीलर एसोसिएशन द्वारा पुकारे गए राज्यव्यापी बंद को नेर तहसील में भी व्यापक समर्थन मिला। सभी प्रमुख कृषि केंद्र बंद रहे और विक्रेताओं ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विक्रेताओं ने कृषि क्षेत्र पर लगाए जा रहे कठोर नियमों को वापस लेने की मांग की। इस दौरान तहसील के कई प्रमुख कृषि केंद्रों ने आंदोलन में भाग लिया।
किसानों के हित में आंदोलन
विक्रेताओं ने उर्वरक लिंकिंग बंद करने, अप्रमाणित बीटी कपास बीजों पर रोक और जांच में दोष मिलने पर विक्रेताओं को आरोपी न बनाने की मांग की। तहसील कृषि संघ के अध्यक्ष राजू नवाडे ने कहा कि यह बंद केवल विक्रेताओं के लिए नहीं, बल्कि किसानों के हित में किया जा रहा है, ताकि गलत बीज और लिंकिंग व्यवस्था से होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
ये भी पढ़ें :- गोंदिया में 2.05 लाख हेक्टेयर पर खरीफ बुआई की तैयारी, खाद-बीज महंगे, नकली बिक्री पर सख्ती
लंबे समय से सरकार नहीं ले रही ठोस निर्णय
कृषि सामग्री विक्रेताओं ने बताया कि पिछले 4 से 5 वर्षों से बीज, रासायनिक खाद और कीटनाशकों के व्यवसाय से जुड़ी समस्याओं को लेकर राज्य सरकार के समक्ष लगातार मांगें रखी जा रही थीं, लेकिन ठोस निर्णय न होने के कारण विक्रेताओं ने आखिरकार आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
इस आंदोलन में केलापुर तहसील कृषि इनपुट एसोसिएशन के अध्यक्ष काशीनाथ मिलमिले, सचिव किशोर देशटीवार, उपाध्यक्ष राजेंद्र कांडूरवार, सुशील कैलासवार और आशिष कापरतीवार सहित अन्य पदाधिकारी भी इसमें शामिल हुए।
