मीरा रोड चाकूबाजी केस: नोट, नफरत और नेटवर्क- क्या सच में ‘लोन वुल्फ’ हमला?
Mira Road Stabbing Case: मीरा रोड चाकूबाजी मामले में ‘लोन वुल्फ’ हमले की जांच के दौरान आईएसआईएस नोट, संदिग्ध डिजिटल गतिविधियां और संभावित नेटवर्क को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Stabbing Case (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Thane ATS Investigation: मीरा रोड में 27 अप्रैल को हुए कथित “लोन वुल्फ अटैक” मामले की जांच में कई नए दावे और विवाद सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपी जैब अंसारी ने हमले से पहले आईएसआईएस के समर्थन में एक नोट इसलिए छोड़ा था क्योंकि उसे उम्मीद थी कि वारदात के बाद पुलिस उसे मार देगी। वहीं बचाव पक्ष ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए सबूतों को “प्लांटेड” बताया है।
नोट और हमले की मंशा पर सवाल
जांच अधिकारियों के अनुसार, अंसारी ने पेंसिल से लिखा एक नोट अपने लैपटॉप के पास टेबल पर रखा था, जिसमें “लोन वुल्फ तुम सब पर हमला करेगा” लिखा था। अधिकारियों का कहना है कि नोट जानबूझकर ऐसी जगह रखा गया था ताकि वह आसानी से दिखे। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में बताया कि उसे लगा था कि हमला करने के बाद वह जीवित नहीं बचेगा और पुलिस उसे मार देगी। उसका उद्देश्य “ डर फैलाना और एक संदेश देना ” था, हालांकि हमले के बाद वह बच गया और पैदल घर लौट आया।
बचाव पक्ष का दावा, सबूत ‘प्लांट’ किए गए
अंसारी के वकील अब्दुल वहाब खान ने पुलिस के दावों को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी को हिरासत में लेने के बाद उसका घर सील नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि घर खुला पड़ा था, ऐसे में कोई भी सबूत रख सकता था। ये सबूत प्लांटेड हैं और अदालत में साबित नहीं हो पाएंगे। “ लोन वुल्फ ” जैसे गंभीर आरोपों को साबित करने के लिए ठोस सबूत जरूरी हैं, जो फिलहाल मौजूद नहीं हैं।
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फोन फॉर्मेट, संदिग्ध गतिविधियां
जांच एजेंसियों को आरोपी के घर से दो फोन एक सिम कार्ड के साथ और एक बिना सिम कार्ड के मिले । दोनों को फॉर्मेट किया गया था। अधिकारियों को शक है कि आरोपी ने किसी भी संभावित संपर्क के सबूत मिटाने की कोशिश की। इसके अलावा, पुलिस को मीरा रोड के एक मॉल की दुकान भी मिली जहां से आरोपी ने करीब 9 इंच का चाकू खरीदा था।
कट्टरपंथ की आशंका
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर आईएसआईएस समर्थक वेबसाइट्स और यू ट्यूब चैनलों को देखता था। अधिकारियों का कहना है कि पहले ऐसे मामलों में आतंकी संगठन ऐसे लोगों से संपर्क करते रहे हैं, इसलिए बाहरी कनेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। डिवाइस की फोरेंसिक जांच से इस पहलू पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
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निजी जीवन और मानसिक स्थिति
सूत्रों के अनुसार, आरोपी का हाल ही में तलाक हुआ था और वह पिछले 6 से 8 महीनों से अकेला रह रहा था। उसकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर थी और पिता से पैसे मिल रहे थे।
उसने पूछताछ में दावा किया कि फ़िलिस्तीन में हो रही घटनाओं, खासकर बच्चों की मौत, ने उसे मानसिक रूप से प्रभावित किया, हालांकि जांच एजेंसियां उसके बयानों को पूरी तरह भरोसेमंद नहीं मान रही हैं।
हमले की घटना
एफआईआर के मुताबिक, 27 अप्रैल की सुबह आरोपी ने मीरा रोड की एक निर्माणाधीन साइट पर दो सुरक्षा गार्डों से उनका धर्म पूछने के बाद उन पर चाकू से हमला किया था।इस हमले में एक सुपरवाइजर गंभीर रूप से घायल हुआ, जबकि दूसरे गार्ड को मामूली चोटें आईं शुरुआत में इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस कर रही थी, लेकिन बाद में इसे महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) को सौंप दिया गया है।
जांच जारी है और एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह पूरी तरह “ लोन वुल्फ ” हमला था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था।
