महाराष्ट्र में ‘ओपन टू ऑल’ के बावजूद 11वीं की सीटें खाली, साइंस में ज्यादा तो कॉमर्स में कम एडमिशन
Maharashtra News: महाराष्ट्र में 11वीं में प्रवेश की प्रक्रिया करीब 2 महीने से चल रही थी। सभी कैप राउंड होने के बाद ‘ओपन टू ऑल’ राउंड शुरू किया गया। बावजूद इसके अब तक आधी सीटें खाली हैं।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Class 11th Admission: इस बार राज्यभर में 11वीं की प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन पद्धति से की गई। समूची व्यवस्था पारदर्शी होने के बाद जिले सहित विभाग में सभी सीटें नहीं भर पाईं। जिले में करीब आधी सीटें खाली रह गई। वहीं सबसे अधिक प्रवेश साइंस और सबसे कम कॉमर्स शाखा में हुए हैं। अब खाली सीटें जूनियर कॉलेजों के लिए भारी पड़ेंगी।
इस बार 11वीं में प्रवेश की प्रक्रिया करीब 2 महीने से चल रही थी। सभी कैप राउंड होने के बाद ‘ओपन टू ऑल’ राउंड शुरू किया गया। इसमें 10वीं की पूरक परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों ने भी हिस्सा लिया। उम्मीद थी कि ओपन टू ऑल राउंड के बाद सीटें भर जाएंगी लेकिन सभी स्कूलों को छात्र नहीं मिल सके।
नागपुर के नामी कॉलेजों में हमेशा की तरह सभी सीटें भर गईं, जबकि अनेक कॉलेजों को अंत तक प्रतीक्षा ही करनी पड़ी। विभाग के 6 जिलों में 11वीं की कुल 2,18,005 सीटें उपलब्ध हैं, जबकि 1,2,6543 सीटें ही भर सकीं। नागपुर जिले में कुल 97,435 सीटों में से 52,827 सीटें भर सकीं। साइंस में सर्वाधिक 32,017 छात्रों ने प्रवेश लिया, जबकि आर्ट में 10,591 और कॉमर्स में 10,219 प्रवेश हो सके।
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जानें नागपुर के 11वीं में प्रवेश के आंकड़े
- नागपुर जिले में कुल सीटें- 97,435
- सीटें भरीं- 52,827
- साइंस में एडमिशन- 32,017
- आर्ट में एडमिशन- 10,591
- कॉमर्स में एडमिशन- 10,219
टाइअप वाले कॉलेज भरे
केंद्रीय प्रवेश पद्धति को लेकर शुरुआत से ही विरोध हो रहा था। संस्था चालकों का कहना था कि महानगर पालिका क्षेत्रों में ऑनलाइन प्रवेश ठीक है लेकिन ग्रामीण भागों में ऑफलाइन पद्धति से ही प्रवेश दिये जायें। इसका असर भी देखने को मिला। यह स्थिति केवल नागपुर विभाग या जिले में ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में बनी हुई है। अब सीटें खाली रहने से जूनियर कॉलेजों में शिक्षकों के अतिरिक्त होने की संभावना बढ़ गई है।
हालांकि नामी कॉलेजों को कोई फर्क नहीं पड़ा है लेकिन साधन-सुविधाओं की कमी वाले जूनियर कॉलेजों की कमर टूटना तय है। कोचिंग-ट्यूशन से टाइअप करने वाले जूनियर कॉलेजों में हमेशा की तरह ही अच्छे प्रवेश हुए हैं। वहीं अल्पसंख्यक कोटा कॉलेजों ने भी अपने हिस्से की अधिकांश सीटें भर लीं।
