Maharashtra Farm Land Registration: राज्य सरकार का बड़ा फैसला, खेती की जमीन के पंजीकरण शुल्क पूरी तरह माफ
Maharashtra Farm Land Registration: महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए खेती की जमीन के अलॉटमेंट सर्टिफिकेट पर लगने वाली पंजीकरण शुल्क पूरी तरह माफ कर दी है।
- Written By: अपूर्वा नायक
चंद्रशेखर बावनकुले (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Farm Land Registration: महाराष्ट्र सरकार ने किसानों और आम जनता को बड़ी राहत देते हुए खेती की जमीन के अलॉटमेंट सर्टिफिकेट पर लगने वाली पंजीकरण शुल्क पूरी तरह माफ कर दी है।
इस फैसले से जमीन से जुड़े मामलों में आर्थिक बोझ कम होगा और प्रक्रिया सरल बनेगी। यह निर्णय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले द्वारा लिया गया है। राजस्व विभाग ने सोमवार को इस संबंध में आधिकारिक सर्कुलर जारी कर दिया।
सेक्शन 85 के तहत छूट
यह छूट महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता 1966 के सेक्शन 85 के अंतर्गत आने वाले मामलों पर लागू होगी। इसके तहत तहसीलदार द्वारा जारी अलॉटमेंट सर्टिफिकेट के पंजीकरण पर अब कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
सम्बंधित ख़बरें
बल्लारपुर सागौन से सजेगा नागपुर का नया टाउन हॉल, मंत्री नितिन गडकरी से मंजूरी बाकी
नागपुर: चुनावी रिश्वत केस में विधायक को राहत, साड़ी-नकद बांटने के आरोपों पर कोर्ट का बड़ा फैसला; FIR की रद्द
तिलक विवाद के बाद बैकफुट पर लेंसकार्ट, ड्रेस कोड नियमों में बदलाव, सभी धर्मों के प्रतीकों को किया शामिल
नागपुर में अवैध शराब पर बवाल, मकोका लगाने की मांग, कानून-व्यवस्था पर सवाल; एसोसिएशन ने सौंपा ज्ञापन
पहले हो रही थी फीस वसूली
सरकार के संज्ञान में आया था कि कई लोग सीधे सेकेंडरी रजिस्ट्रार कार्यालय में अलॉटमेंट सर्टिफिकेट जमा कर रहे थे, जहां स्पष्ट प्रावधान न होने के कारण उनसे पंजीकरण शुल्क लिया जा रहा था। इस स्थिति से किसानों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी।
विरासत और बंटवारे में भी राहत
नए नियम के अनुसार, विरासत में मिली पुश्तैनी खेती की जमीन के पंजीकरण पर भी अब शुल्क नहीं लगेगा। साथ ही, एक ही परिवार के सदस्यों के बीच जमीन के बंटवारे के दस्तावेजों पर भी कोई फीस नहीं ली जाएगी।
ये भी पढ़ें :- Asmita Mishra Death Case में बड़ा फैसला, बॉम्बे हाईकोर्ट ने जांच CBI को सौंपी
प्रक्रिया होगी आसान
सरकार के इस फैसले से किसानों के लिए जमीन से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक कार्य आसान होंगे। साथ ही, इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक खर्च से भी राहत मिलेगी।
