

महाराष्ट्र के बाजारों में इस बार दिवाली पर महंगाई और उत्सव का मिला-जुला माहौल है।
ग्रामीण इलाकों में सूखे और फसलों के नुकसान के कारण किसानों की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
सरकार ने सूखा प्रभावित किसानों के खातों में आर्थिक सहायता भेजने का निर्णय लिया है।
Maharashtra Diwali 2026 Inflation And Drought Effect: महाराष्ट्र में इस वर्ष दिवाली का महापर्व 5 नवंबर से 11 नवंबर 2026 तक मनाया जा रहा है, जिसमें 8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजन का मुख्य पर्व है। रोशनी के इस त्योहार के आगमन के साथ ही एक तरफ जहां शहरों के बाजार दुल्हन की तरह सज चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई और ग्रामीण इलाकों में सूखे की मार से इस बार की दिवाली का माहौल मिला-जुला नजर आ रहा है।
ऐसा नहीं कहा जा सकता की महाराष्ट्र में इस समस्याओं के कारण दिवाली और वाजार में काई उत्साह नहीं होगा परंतु यह निश्चित है कि कुछ लोगों के लिये दिवाली जरूर दिवाला निकालने वाली होगी।
दिवाली की तैयारियों के बीच मुंबई के धारावी स्थित पॉटरी वर्कशॉप्स में कुम्हार और कारीगर दिन-रात मेहनत करके पारंपरिक मिट्टी के दीये तैयार करने में जुटे हुए हैं। नासिक के बाजारों जैसे रविबार करंजा, पंचवटी और भांडी बाजार में मिट्टी के दीयों, रंग-बिरंगे आकाश कंदील और पूजा सामग्रियों की दुकानें सज गई हैं।
पर्यावरण-अनुकूल उत्सव मनाने के लिए प्लास्टिक की लाइटों के बजाय मिट्टी के दीयों का उपयोग करने को लेकर भी विशेष अभियान देखा जा रहा है।
त्योहारों के इस सीजन में मुंबई शहर और पुणे जैसे शहरों में आम जनता को भीषण महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। नवी मुंबई स्थित APMC अनाज मंडी में खरीफ उत्पादन घटने की आशंका से ज्वार का भाव ₹30 से ₹75 प्रति किलो और साधारण चावल ₹40 से ₹60 प्रति किलो तक पहुंच गया है।
चना दाल के भाव बढ़कर ₹85 से ₹110 प्रति किलो (रिटेल बाजार में ₹100 से ₹120/किलो) हो गए हैं, जिससे दिवाली के पारंपरिक फराल (चकली, चिवड़ा, बेसन लड्डू) को तैयार करना काफी खर्चीला हो गया है।
पुणे के रिटेल मार्केट में दिवाली से ठीक पहले चीनी के दाम में ₹5 प्रति किलो का इजाफा हुआ है, जिससे रिटैल भाव ₹59 से ₹60 प्रति किलो तक पहुंच गया है। इन सब के बावजूद, पुणे में व्यापारियों के संघों ने लक्ष्मी रोड, कुमठेकर रोड और बाजीराव रोड पर लगभग 3 किलोमीटर लंबे बाजार क्षेत्र को विशेष दिवाली लाइटिंग से रोशन किया है।
शहरी जगमगाहट के विपरीत, मराठवाड़ा और विदर्भ के ग्रामीण क्षेत्रों में दिवाली का माहौल काफी उदास और चिंताजनक है। एल नीनो और मानसूनी बारिश की भारी कमी के कारण राज्य के 34 जिलों के 305 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। धाराशिव जैसे जिलों में 41% बारिश की कमी के कारण कपास और सोयाबीन की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं।
धाराशिव के कस्बे तोडवले साप्ताहिक बाजार में खरीदारों की संख्या 50 से 60 प्रतिशत तक घट गई है और किसानों की क्रय शक्ति समाप्त हो चुकी है। 1 नवंबर 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र की मंडियों में सोयाबीन का औसत मोडल भाव ₹7,274 प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है।
दिवाली से ठीक पहले महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के गंभीर सूखा-प्रभावित 1.5 करोड़ किसानों के खातों में DBT के जरिए ₹5,000 की अग्रिम आर्थिक सहायता भेजने का फैसला किया है। साथ ही, सरकार 4.15 लाख किसानों के लिए ₹4,000 करोड़ की कर्जमाफी की प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दे रही है।
हालांकि, भारी फसल नुकसान झेल रहे किसानों का कहना है कि यह राहत अपर्याप्त है, लेकिन इस आर्थिक तंगी के समय में कुछ संबल जरूर प्रदान करेगी।