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Maharashtra Court sentences 7 years in prison for attacking female doctor: महाराष्ट्र के ठाणे में महिला डॉक्टर पर हुए हमले के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। हमलावर को सात साल की कठोर कैद और ₹20,000 का जुर्माना लगाया गया है। यह घटना कोविड महामारी के दौरान डॉक्टर पर हुए बर्बर हमले से जुड़ी है। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधों पर सख्त सजा देना जरूरी है ताकि समाज में डर और अनुशासन का संदेश जाए।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक महिला डॉक्टर पर हथौड़े से हमला और लूट करने वाले 56 वर्षीय राशिद शकील खान को अदालत ने सात साल की कैद की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वसुंधरा भोसले ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि यह फैसला समाज में सख्त संदेश देगा कि डॉक्टरों पर हमला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
आरोपी पर ₹20,000 का जुर्माना भी लगाया गया, जिसमें से ₹10,000 डॉक्टर को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे। यह आदेश 31 अक्टूबर को पारित किया गया था और शनिवार को इसकी प्रति सार्वजनिक की गई।
आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत घर में घुसकर चोट पहुंचाने, हथियार से डकैती और हिंसा करने का दोषी पाया गया। साथ ही उसे “डॉक्टरों और चिकित्सा संस्थानों पर हिंसा रोकथाम अधिनियम, 2019” के तहत भी सजा दी गई। मामले में 14 गवाहों ने अदालत में गवाही दी, जिनके आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया गया।
यह घटना 3 जनवरी 2021 की है, जब कोविड-19 महामारी के दौरान आरोपी राशिद खान, डॉ. गायत्री नंदलाल जायसवाल के भायंदर स्थित क्लिनिक में RT-PCR टेस्ट के बारे में पूछताछ के बहाने पहुंचा। डॉक्टर ने उसे इंतजार करने को कहा, जिस पर वह नाराज होकर चला गया। कुछ समय बाद वह लौटा और अचानक लोहे के हथौड़े से डॉक्टर पर हमला कर दिया। उसने सिर पर कई वार किए और डॉक्टर की सोने की चेन, अंगूठी, मोबाइल फोन और 5,000 रुपए लूट लिए और भाग गया।
हमले में डॉक्टर को गंभीर सिर की चोटें आईं, जिससे सिर में खून का थक्का बन गया। अदालत ने कहा कि यह चोटें जानलेवा थीं और अगर समय पर इलाज न होता तो डॉक्टर की जान जा सकती थी।
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अदालत ने कहा कि डॉक्टर समाज की सेवा करते हैं, इसलिए उनके खिलाफ हिंसा को सख्ती से दंडित करना आवश्यक है। यह फैसला न केवल आरोपी के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि डॉक्टरों के प्रति हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।