लातूर में कृषि अधिकारी समेत 7 पर गिरी गाज, सहकार मंत्री का औचक छापा, अफसर-कर्मचारी थे नदारद
Latur News: किसानों की शिकायत पर सहकार मंत्री बाबासाहब पाटिल ने लातूर जिले के चाकूर तहसील कृषि कार्यालय का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान अफसर-कर्मचारी नदारद पाए गए।
- Written By: आकाश मसने
मंत्री बाबासाहब पाटिल (सोर्स: सोशल मीडिया)
Minister Babasaheb Patil Conducted Surprise Inspection: लातूर जिले के चाकूर तहसील कृषि कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों की लगातार अनुपस्थिति को लेकर किसानों में गहरी नाराजगी है। किसानों ने बार-बार शिकायत की थी कि जब वे फसल नुकसान की जानकारी देने या अपनी समस्याओं के समाधान के लिए कार्यालय पहुंचते हैं तो वहां अफसर मिलते ही नहीं। इसी मुद्दे पर राज्य के सहकार मंत्री बाबासाहब पाटिल ने गुरुवार सुबह साढ़े 11 बजे अचानक कृषि कार्यालय का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान स्थिति बेहद चौंकाने वाली थी। कार्यालय में केवल तीन कर्मचारी मौजूद थे, जबकि तहसील कृषि अधिकारी और मंडल कृषि अधिकारी दोनों अनुपस्थित पाए गए। इतना ही नहीं, सात अन्य कर्मचारी भी ड्यूटी पर नहीं थे। इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए सहकार मंत्री ने तहसीलदार को कार्यालय का पंचनामा करने और कामचोर कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए।
अधिकारी करते थे टालमटोल
गौरतलब है कि चाकूर तहसील के हजारों किसान इस समय अतिवृष्टि से बुरी तरह प्रभावित हैं। लगातार बारिश से उनकी फसलें चौपट हो चुकी हैं और किसान नुकसान का पंचनामा करवाने के लिए कृषि कार्यालय का रुख कर रहे हैं। लेकिन अफसरों की अनुपस्थिति के कारण किसानों को बार-बार निराश होकर लौटना पड़ रहा है। यही नहीं, जब किसान संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश करते हैं तो उन्हें टालमटोल भरे जवाब दिए जाते हैं।
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बाबासाहब पाटिल पहुंचे कृषि कार्यालय
इस स्थिति से नाराज किसानों ने गुरुवार को मंत्री बाबासाहब पाटिल को सीधे शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही मंत्री स्वयं कार्यालय पहुंचे और वहां की हकीकत देखी। किसानों ने मौके पर ही मंत्री के सामने अधिकारियों की लापरवाही से जुड़ी शिकायतें भी प्रस्तुत कीं।
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मंत्री पाटिल ने कहा कि किसानों की समस्याओं का तुरंत समाधान होना चाहिए। अफसरों को समय पर कार्यालय में उपस्थित रहना अनिवार्य है, अन्यथा उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगे भी इसी तरह की शिकायतें मिलती हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।
इस औचक निरीक्षण ने जहां कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं किसानों में उम्मीद जगी है कि अब उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाएगा और समाधान भी मिलेगा।
