शाहू महाराज और टीपू सुल्तान (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Shivaji Maharaj vs Tipu Sultan Row: कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज की तुलना टीपू सुल्तान से किए जाने पर माफी मांगकर विवाद को शांत करने की कोशिश की गई थी। लेकिन कांग्रेस के कोल्हापुर सांसद शाहू महाराज छत्रपति ने एक बार फिर टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपतियों से करते हुए इस विवाद को फिर हवा दे दी है।
इससे यह विवाद दोबारा कांग्रेस के गले पड़ने की आशंका जताई जा रही है। राज्य में इन दिनों टीपू सुल्तान के मुद्दे पर राजनीति गरमाई हुई है। मालेगांव की नगरसेविका शान-ए-हिंद द्वारा अपने कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने के बाद यह विवाद शुरू हुआ। इसके बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कथित तौर पर टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से की।
विपक्ष की तीखी आलोचना के बाद उन्होंने माफी मांग ली और मामला शांत होता दिखा। लेकिन अब शाहू महाराज छत्रपति ने फिर से इस विवाद को तूल दे दिया है। सांसद शाहू महाराज छत्रपति ने कथित तौर पर टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज के कार्य से की। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के कार्यों से प्रेरणा लेकर ही मैसूर के टीपू सुल्तान ने काम करने का निश्चय किया था।
हम ब्रिटिशों के खिलाफ लड़ रहे थे, उसी समय टीपू सुल्तान भी अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष कर रहे थे। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि उस दौर में अंग्रेजों की मदद किसने की। उन्होंने आगे कहा कि शिवाजी महाराज सभी के लिए प्रेरणास्थान हैं। शासन-प्रशासन और शत्रुओं के विरुद्ध युद्ध में उन्होंने जो आदर्श स्थापित किए, उन्हें कई राजाओं ने अपनाया।
यह भी पढ़ें – अहिल्यानगर में मचा हड़कंप, शरद गुट के जिला अध्यक्ष के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज, नौकरी का दिया था झांसा!
उसी तरह टीपू सुल्तान ने भी शिवाजी महाराज की कार्यप्रणाली से प्रेरणा लेकर आगे की राह तय की। साथ ही शाहू महाराज ने इतिहास पर रोज-रोज होने वाले नए विवादों पर खेद जताते हुए कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं पर झगड़ा करने के बजाय उनसे सही प्रेरणा लेना अधिक आवश्यक है।
हर्षवर्धन सपकाल ने दो दिन पहले अपने बयान पर माफी मांगी थी और इस पूरे विवाद के लिए सत्ताधारी भाजपा को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा कि सरकारी दफ्तरों में विभिन्न महापुरुषों की तस्वीरें एक साथ लगाने से समाज में वैमनस्य नहीं, बल्कि एकता का संदेश जाना चाहिए-यही उनके 70 सेकंड के बयान का आशय था।
दुर्भाग्यवश, उनके बयान के एक शब्द को संदर्भ से काटकर जानबूझकर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। सोशल मीडिया पर भ्रामक अभियान चलाकर उन्होंने जो कहा ही नहीं, वह उनके मुंह में डाला गया और छत्रपति शिवाजी महाराज से तुलना का गलत अर्थ निकाला गया।
हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि भाजपा और उसकी सहयोगी ताकतों ने योजनाबद्ध तरीके से यह दुष्प्रचार फैलाया, जिससे राज्य में धार्मिक तनाव पैदा करने और दंगे भड़काने की कोशिश हुई-जिसका उदाहरण पुणे में देखा गया।