Police Race Death ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Police Recruitment Maharashtra: छत्रपति संभाजीनगर पुलिस बनने का सपना आंखों में संजोए 1600 मीटर की दौड़ में पूरी ताकत से भाग रहे सांगली जिले के 24 वर्षीय युवक की अंतिम फेरी में अचानक मृत्यु हो गई। लक्ष्य रेखा से मात्र दो कदम पहले वह धावक अचानक जमीन पर गिर पड़ा और कुछ ही क्षणों में उसकी सांसें थम गई।
शनिवार 21 फरवरी को शहर के गोकुल मैदान में घटी इस घटना से भर्ती प्रक्रिया में शोक की लहर दौड़ गई, मोराले, तहसील पलूस, जिला सांगली निवासी संग्राम धोंडीराम शिंदे सुबह से ही भर्ती प्रक्रिया के लिए मैदान पर उपस्थित था। पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर स्थित गोकुल मैदान में रेलवे पुलिस भर्ती की शारीरिक परीक्षा चल रही थी।
संग्राम ने शारीरिक माप, दस्तावेज जांच और बायोमेट्रिक प्रक्रिया पूरी करने के बद 1600 मीटर दौड़ के लिए स्वयं को तैयार किया। चार चक्करों की इस दौड़ में पहले तीन चक्करों तक वह आगे चल रहा था।
उसके चेहरे पर दृढ़ निश्चय साफ दिखाई दे रहा था। अंतिम चक्कर में थोड़ी बढ़त खोने के बाद उसने पूरी ताकत लगा दी। जैसे ही लक्ष्य रेखा सामने दिखाई दी, उसने गति तेज की।
लेकिन फिनिश लाइन से महज दो कदम पहले वह अचानक गिर पड़ा। मैदान में कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया। पुलिसकर्मियों और अन्य उम्मीदवारों ने तुरंत उसे उठाया और एंबुलेंस से शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल ले जाया गया, वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
भतीं प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए मैदान में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। जांच में सामने आया कि सुबह लगभग 8,38 बजे संग्राम फिनिश लाइन से पहले गिरा, लगभग 8:40 बजे उसे एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया, पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो चुकी है।
संग्राम उच्च शिक्षित और मेहनती युवक था। वह बीड जिले के गेवराई स्थित आर. बी. अट्टल महाविद्यालय में एम। एससी प्रथम वर्ष का छात्र था। वह अपने रिश्तेदारों के साम रहकर पढ़ाई और पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था।
इससे पहले दो बार भर्ती प्रक्रिया में असफल होने के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी। इस बार रेलवे पुलिस बल में क्थन उसका लक्ष्य था। उसके बहनोई सेना में कार्यरत हैं और उन्हीं से प्रेरणा लेकर उसने सरकारी सेवा में जाने का संकल्प लिया था।
संग्राम के माता पिता अल्पभूधारक किसान हैं, परिवार की आजीविका खेती पर निर्भर है। एकमात्र पुत्र होने के कारण परिवार की सभी आशाएं उसी पर टिकी थीं।
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उसकी एक बहन है, जिसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी भी वह निभा रहा था। परिवार को विश्वास था कि संग्राम पुलिस बनकर घर की आर्थिक स्थिति सुधारेगा।
घटना की जानकारी मिलते ही परिजन छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे। गांव में शोक का माहौल है और हर कोई उनकी मेहनत और जिद को याद कर रहा है।