संजय गायकवाड़ का ‘यू-टर्न’: ‘शिवाजी कोण होता?’ पुस्तक विवाद में विधायक ने मांगी माफी, नरम पड़े तेवर
Sanjay Gaikwad Apology: 'शिवाजी कोण होता?' पुस्तक विवाद पर विधायक संजय गायकवाड़ ने मांगी माफी। रोहित पवार के विरोध के बाद बदला रुख।
- Written By: अनिल सिंह
Sanjay Gaikwad Apologizes for Book Controversy (फोटो क्रेडिट-X)
Sanjay Gaikwad Apologizes for Book Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में कॉमरेड गोविंद पानसरे की पुस्तक ‘शिवाजी कोण होता?’ को लेकर मचा घमासान अब शांत होता नजर आ रहा है। शिंदे गुट के आक्रामक विधायक संजय गायकवाड़ ने इस मामले में ‘यू-टर्न’ लेते हुए अपने बयानों के लिए माफी मांग ली है। प्रकाशक प्रशांत अम्बी को अपशब्द कहने और जान से मारने की धमकी देने के आरोपों के बाद चारों तरफ से घिरे गायकवाड़ ने आखिरकार अपने शब्दों पर खेद व्यक्त किया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब गायकवाड़ ने पुस्तक के शीर्षक और सामग्री पर आपत्ति जताते हुए प्रकाशक को फोन पर कथित तौर पर गाली दी थी। इसके बाद कोल्हापुर में प्रकाशक प्रशांत अम्बी ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और एनसीपी (शरद चंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने गायकवाड़ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।
क्यों झुकना पड़ा विधायक को?
संजय गायकवाड़ के माफी मांगने के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं:
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रोहित पवार का आंदोलन: कोल्हापुर के राजारामपुरी पुलिस स्टेशन में रोहित पवार की मौजूदगी और ‘सामूहिक पठन’ के आयोजन ने सरकार पर दबाव बना दिया था।
कानूनी कार्रवाई का डर: पुलिस ने हालांकि मामला दर्ज करने के लिए दो दिन का समय मांगा था, लेकिन कानूनी जानकारों का मानना था कि धमकी और गाली-गलौज के मामले में विधायक की मुश्किलें बढ़ सकती थीं।
पार्टी नेतृत्व का निर्देश: सूत्रों के अनुसार, एकनाथ शिंदे नहीं चाहते थे कि इस विवाद से महायुति सरकार की छवि ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के विरोधी के रूप में बने।
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माफीनामे में क्या कहा?
विधायक संजय गायकवाड़ ने अपने स्पष्टीकरण में कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज हमारे आराध्य देव हैं। उनके नाम का उल्लेख जिस तरह से पुस्तक में किया गया था, उससे मेरी भावनाएं आहत हुई थीं। महाराज के सम्मान में मैंने गुस्से में कुछ बातें कह दी थीं। लेकिन यदि मेरे शब्दों से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है या प्रकाशक को बुरा लगा है, तो मैं अपने शब्द वापस लेता हूँ और इसके लिए माफी मांगता हूँ।”
विपक्ष की प्रतिक्रिया
रोहित पवार ने इस माफीनामे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सत्य और वैचारिक स्वतंत्रता की जीत है। उन्होंने कहा कि सत्ता की हनक में किसी को भी धमकाने का अधिकार नहीं है। कोल्हापुर के राजारामपुरी पुलिस स्टेशन के बाहर जमा हुए कार्यकर्ताओं ने विधायक की माफी के बाद अपना विरोध प्रदर्शन वापस लेने का फैसला किया है। हालांकि, प्रकाशक प्रशांत अम्बी ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है कि वे अपनी पुलिस शिकायत वापस लेंगे या नहीं।
