संजय गायकवाड़ के खिलाफ मामला दर्ज करने से पुलिस का इनकार, पुलिस के रवैये से नाराज प्रशांत अम्बी

Sanjay Gaikwad Controversy: कोल्हापुर में प्रकाशक प्रशांत अम्बी को धमकी देने वाले विधायक संजय गायकवाड़ के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज करने से किया इनकार। रोहित पवार उतरे समर्थन में।
Sanjay Gaikwad vs Prashant Ambi
Sanjay Gaikwad vs Prashant Ambi (फोटो क्रेडिट-X)
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Sanjay Gaikwad vs Prashant Ambi: महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कोल्हापुर में कॉमरेड गोविंद पानसरे की प्रसिद्ध पुस्तक 'शिवाजी कोण होता?' (शिवाजी कौन थे?) के शीर्षक और सामग्री को लेकर शिंदे गुट के विधायक संजय गायकवाड़ और प्रकाशक प्रशांत अम्बी आमने-सामने हैं। आरोप है कि विधायक गायकवाड़ ने पुस्तक के शीर्षक पर आपत्ति जताते हुए प्रकाशक को भद्दी गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में पुलिस के ढुलमुल रवैये ने आग में घी डालने का काम किया है।

प्रकाशक प्रशांत अम्बी ने कोल्हापुर के राजारामपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन पुलिस ने विधायक के खिलाफ तत्काल मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया है। पुलिस का कहना है कि वे अपनी कानूनी टीम से परामर्श करने के बाद ही कोई निर्णय लेंगे।

पुलिस की कार्रवाई पर सवाल

प्रशांत अम्बी ने पुलिस को दी गई शिकायत में स्पष्ट किया है कि विधायक गायकवाड़ ने न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी। अम्बी ने मांग की है कि गायकवाड़ के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 351 (3), 352, 356, 192 और मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाए। पुलिस ने अम्बी को शिकायत की रसीद तो दे दी है, लेकिन FIR दर्ज करने के लिए दो दिनों का समय मांगा है।

रोहित पवार की एंट्री: सामूहिक पठन का एलान

इस विवाद में अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार भी कूद पड़े हैं। रोहित पवार आज शाम 5 बजे राजारामपुरी पुलिस स्टेशन पहुंचकर अधिकारियों से चर्चा करेंगे और गायकवाड़ के खिलाफ मामला दर्ज करने का दबाव बनाएंगे। इसके बाद, शाम 6 बजे वे 'शिवाजी कोण होता?' पुस्तक के सामूहिक पठन कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। यह कदम विधायक गायकवाड़ के विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

विवाद की जड़

यह पुस्तक लगभग 37 साल पहले लिखी गई थी और महाराष्ट्र के वैचारिक हलकों में बेहद लोकप्रिय है। विधायक संजय गायकवाड़ का आरोप है कि पुस्तक का शीर्षक और उसमें छत्रपति शिवाजी महाराज का उल्लेख अपमानजनक तरीके से किया गया है। दूसरी ओर, प्रगतिशील विचारकों का कहना है कि यह पुस्तक महाराज के वास्तविक और लोक-कल्याणकारी कार्यों को उजागर करती है।

फिलहाल, कोल्हापुर पुलिस के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं। यदि दो दिनों के भीतर मामला दर्ज नहीं होता है, तो विपक्षी दल और प्रकाशक संगठन बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

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