कोल्हापुर की ग्राम पंचायतें हुई ऑफलाइन, 'आपले सरकारी केंद्र' बंद होने से 735 संचालक हुए बेरोजगार

'आपले सरकारी केंद्र' जारी रखने के संबंध में सरकार की ओर से स्पष्ट आदेश नहीं मिलने के कारण जिले की सभी 1025 ग्राम पंचायतों का ऑनलाइन कामकाज बंद हो गया है। सरकारी केंद्रों पर ऑपरेटरों ने काम करना बंद कर दिया है।
कोल्हापुर की ग्राम पंचायतें हुई ऑफलाइन, 'आपले सरकारी केंद्र' बंद होने से 735 संचालक हुए बेरोजगार
(प्रतीकात्मक तस्वीर)
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कोल्हापुर: 'आपले सरकारी केंद्र' जारी रखने के संबंध में सरकार की ओर से स्पष्ट आदेश नहीं मिलने के कारण जिले की सभी 1025 ग्राम पंचायतों का ऑनलाइन कामकाज बंद हो गया है। सरकारी केंद्रों पर ऑपरेटरों ने काम करना बंद कर दिया है। इससे ग्रामीणों को मिलने वाली ऑनलाइन सेवाएं बाधित हो गई हैं। परिणामस्वरूप सभी ग्राम पंचायतें ऑफलाइन हो गई हैं।

कोल्हापुर जिले की 1025 ग्राम पंचायतों का ऑनलाइन कामकाज 735 आपले सरकारी केंद्र से संचालित हो रहा था। 2016 से ग्राम पंचायत में इन केंद्रों के निजी संचालकों को सीएससी-एसपीवी कंपनी द्वारा भुगतान किया जा रहा था। हालांकि, इन कंपनी के साथ अनुबंध 30 जून 2024 को समाप्त हो गया। इसके बाद सरकार ने सेंटर चलाने की जिम्मेदारी महा आईटी कंपनी को सौंप दी। लेकिन, महा आईटी ने ग्राम पंचायत में सरकारी केंद्र चलाने से इनकार कर दिया। उसके बाद से सरकार ने केंद्र को लेकर ऐसे स्पष्ट आदेश जारी नहीं किया। केंद्र में ऑपरेटर, 12 तहसीलों के प्रबंधकों और एक जिला प्रबंधक के वेतन के मुद्दे के कारण, इन सभी ने काम करना बंद कर दिया है।

जन्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीकरण, मॉडल 1 से 33 प्रमाण पत्र, पीएम विश्वकर्मा, लाडकी बहीण पंजीकरण, गति शक्ति, कर्मचारी पारिश्रमिक, केंद्र चालक पारिश्रमिक, ई-ग्राम स्वराज जैसी ऑनलाइन सेवाएं बंद कर दी गई हैं। ग्राम पंचायतों की गतिशील कार्यप्रणाली ठप हो गई है। सारा सिस्टम फिर से ऑफलाइन होने से प्रशासन की सिरदर्द बढ़ गया है।

आपले सरकारी केंद्र बंद होने से सरपंच, उपसरपंच को दो माह से वेतन नहीं मिला है। विधायकों से शिकायत किए जाने के बाद ऑफलाइन वेतन निकासी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन, अन्य बंद सेवाओं को लेकर सरकारी स्तर पर कोई ठोस हलचल नहीं दिख रही है। इससे लाडली बहन योजना का ऑनलाइन आवेदन भरना भी बंद हो गया है, सेंटर में काम करने वाले ऑपरेटरों को कंपनी से 7 हजार रुपए पारिश्रमिक मिलता था। हालांकि, सरकार के साथ कंपनी का अनुबंध खत्म होने से ऑपरेटरों की नौकरी चली गई है। 735 संचालक बेरोजगार हो गए हैं।

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