कोल्हापुर के गोकुल दूध संघ में प्रशासक राज लागू, 5 सदस्यीय बोर्ड ने संभाली कमान; जानें क्या होगा असर?
Kolhapur Gokul News: कोल्हापुर के गोकुल दूध संघ में निदेशक मंडल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने प्रशासक मंडल की नियुक्ति कर दी है। 5 अधिकारियों की टीम अब संघ का कामकाज संभालेगी।
- Written By: आकाश मसने
कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (सोर्स: सोशल मीडिया)
kolhapur Gokul Milk Administrative Committee News: कोल्हापुर जिला दुग्ध उत्पादक संघ अब सरकारी प्रशासकों की देखरेख में काम करेगा। महाराष्ट्र सहकारी समिति अधिनियम, 1960 की धाराओं के तहत हालिया कानूनी संशोधनों का हवाला देते हुए, मौजूदा निदेशक मंडल का कार्यकाल समाप्त होने पर प्रशासक नियुक्त करने के औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं।
पुणे संभाग के संभागीय उप-रजिस्ट्रार राजकुमार पाटिल द्वारा जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य संघ के प्रशासनिक कार्यों में निरंतरता बनाए रखना और प्रबंधन में किसी भी संभावित गतिरोध को रोकना है।
अब कौन चलाएगा गोकुल का प्रशासन?
कोल्हापुर जिला दुग्ध उत्पादक संघ को लोकप्रिय रूप से गोकुल के नाम से जाना जाता है। सरकार ने इस जिम्मेदारी के लिए पांच अनुभवी अधिकारियों का एक प्रशासक मंडल गठित किया है। इस मंडल का नेतृत्व सातारा जिला उप-रजिस्ट्रार संजयकुमार विश्वनाथ सुद्रिक करेंगे। उनके साथ टीम में कोल्हापुर, पुणे और सतारा संभाग के कुशल अधिकारी शामिल किए गए हैं।
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- अध्यक्ष: संजयकुमार विश्वनाथ सुद्रिक (जिला उप-रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, सातारा)
- सदस्य: प्रदीप महादेव मालगावे (सहायक रजिस्ट्रार, चांदगढ़, कोल्हापुर)
- सदस्य: सुनील रामचंद्र धायगुडे (सहायक रजिस्ट्रार, जुन्नार, पुणे)
- सदस्य: सागर बलकावडे (ऑडिटर, सहकारी समितियां, कोल्हापुर)
- सदस्य: चंद्रकांत पारुलेकर (अनुभाग प्रमुख, कलेक्टर कार्यालय, कोल्हापुर)
प्रशासक मंडल का क्या होगा काम?
इस नवनियुक्त प्रशासक मंडल को संघ के सभी लेन-देन और परिचालन कार्यों पर पूर्ण नियंत्रण रखने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि यह मंडल कोई भी बड़ा नीतिगत निर्णय स्वतंत्र रूप से नहीं ले पाएगा। किसी भी महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के लिए उन्हें सक्षम प्राधिकारी से पूर्व-अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। यह आदेश 4 मई 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
कोल्हापुर की राजनीति और डेयरी क्षेत्र में इस बदलाव को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि गोकुल न केवल जिले की बल्कि राज्य की प्रमुख सहकारी संस्थाओं में से एक है। अब देखना यह होगा कि नई चुनाव प्रक्रिया शुरू होने तक यह प्रशासक मंडल किसानों और दूध उत्पादकों के हितों की रक्षा किस प्रकार करता है।
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क्या है गोकुल?
कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ लिमिटेड अपने लोकप्रिय ब्रांड ‘गोकुल’ से सुप्रसिद्ध है। यह एक ऑपरेशन फ्लड सहकारी डेयरी प्रोजेक्ट है जिसकी स्थापना 16 मार्च 1963 को हुई थी। तब से इसने दूध खरीद, विस्तार, पशु स्वास्थ्य, प्रजनन, दूध प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण और विपणन के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं।
वर्तमान में गोकुल के पास 17 लाख लीटर/दिन की क्षमता वाला आधुनिक डेयरी संयंत्र, शिरोल तालुका के उदगांव में एक उपग्रह डेयरी और नवी मुंबई में आधुनिक पैकिंग इकाई सहित कुल 8 लाख लीटर/दिन दूध क्षमता वाले 4 स्वयं के चिलिंग सेंटर हैं।
